NEET पेपर लीक के दोषियों को क्या-क्या सजा मिल सकती है?

चर्चा में यह कानून
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NEET पेपर लीक के दोषियों को क्या-क्या सजा मिल सकती है?सांकेतिक चित्र इंटरनेट से साभार
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नयी दिल्ली :  केंद्र सरकार ने दो साल पहले प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली धांधली को रोकने के लिए 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 2024' लागू किया था। फरवरी 2024 में यह अधिनियम पारित हुआ और 21 जून 2024 से लागू हो गया। इस कानून के तहत सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली धांधली, पेपर लीक और ठगी पर लगाम लगाने के लिए लाया गया था। नीट यूजी 2026 कैंसिल होने के बाद एक बार फिर इस कानून की चर्चा हो रही है।

परीक्षा में धांधली और पेपर लीक के दोषियों के लिए ये सजा का प्रावधान है

सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) नए कानून का उद्देश्य परीक्षाओं में ट्रांसपरेंसी लाना और अपराधियों को रोकना है। प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली, पेपर लीक और अन्य अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले दोषियों के लिए कड़े दंड का प्रावधान है।

3 से 5 साल तक की जेल और 10 लाख तक जुर्माना

पेपर लीक और परीक्षा में धांधली करने वाले व्यक्ति को दोषी साबित होने पर 3 से 5 साल तक की जेल हो सकती है। इसके अलावा उन पर 10 लाख रुपये तक जुर्माना भी लगाया जा सकता है। कोर्ट चाहे तो सजा और जुर्माना दोनों लगा सकती है।

संगठित गिरोह को 5 से 10 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये का जुर्माना

प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली या पेपर लीक में शामिल किसी संगठित गिरोह के लोगों को 5 साल से 10 साल तक की जेल हो सकती है। इसके अलावा गिरोह में शामिल सभी लोगों पर कम से कम एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है।

1 करोड़ तक जुर्माना और 4 साल का प्रतिबंध

अगर कोई सर्विस प्रोवाइडर कंपनी पेपर लीक, परीक्षा में धांधली या अनुचित साधनों का इस्तेमाल में दोषी पाई जाती है तो उस पर 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाने के साथ संस्था को अगले चार साल के लिए बैन कर दिया जाएगा। संस्था अगले चार साल तक कोई सार्वजनिक परीक्षा आयोजित करने से ब्लैकलिस्ट कर दी जाएगी। इसके अलावा, परीक्षा की पूरी लागत भी उसी संस्था से वसूली जाएगी।

इसके अलावा...

सरकार के नए कानून में उम्मीदवारों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने के साथ गैर-जमानती कैटेगरी भी बनाई है। ऐसे लोगों को पुलिस बिना वारंट गिरफ्तार कर सकती है और दोषी को आसानी से जमानत भी नहीं मिलेगी। अगर अपराध गंभीर है तो व्यक्ति या संस्था की संपत्ति कुर्क यानी सीज की जा सकती है। वहीं संस्थान, बोर्ड या एजेंसी के किसी अधिकारी के धांधली में शामिल पाया जाता है तो उन्हें भी सजा दी जाएगी।

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