नगांव उपचुनाव का मतदान मंगलवार को, मतगणना 9 अक्टूबर को

भाजपा-कांग्रेस-एआईयूडीएफ की प्रतिष्ठा दांव पर
नगांव उपचुनाव का मतदान मंगलवार को, मतगणना 9 अक्टूबर को
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नगांव : असम की मुस्लिम बहुल नगांव लोकसभा सीट पर मंगलवार को होने वाले उपचुनाव के लिए चुनावी जंग अपने निर्णायक दौर में पहुंच गई है। भाजपा, कांग्रेस और एआईयूडीएफ ने इस सीट पर जीत के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। प्रचार अभियान रविवार को समाप्त हो गया और अब मंगलवार, 6 अक्टूबर को मतदान होगा। मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। इस उपचुनाव को राज्य की मौजूदा राजनीतिक तस्वीर के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन की बड़ी जीत के बाद नगांव में होने वाला यह पहला प्रमुख चुनावी मुकाबला है। भाजपा जहां कांग्रेस के कब्जे वाली सीट पर अपनी पकड़ बनाने की कोशिश में है, वहीं कांग्रेस इसे बरकरार रखकर विधानसभा चुनाव के बाद अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करना चाहती है। एआईयूडीएफ भी अपने पुराने प्रभाव को वापस हासिल करने की कोशिश में है।

तीन प्रमुख चेहरों के बीच सीधा मुकाबला

नगांव सीट पर मुख्य मुकाबला भाजपा के देवाशीष शर्मा, कांग्रेस के सिबामोनी बोरा और एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल के बीच है। शर्मा पूर्व आईएएस अधिकारी हैं और चुनाव मैदान में उतरने से पहले नगांव के जिला आयुक्त के रूप में काम कर चुके हैं। उन्होंने सितंबर में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर भाजपा में प्रवेश किया और पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार बनाया। कांग्रेस ने पूर्व विधायक सिबामोनी बोरा पर दांव लगाया है। वहीं, एआईयूडीएफ ने अपने प्रमुख और बिन्नाकांडी के विधायक बदरुद्दीन अजमल को मैदान में उतारा है। अजमल तीन बार धुबरी से लोकसभा सांसद रह चुके हैं और इस चुनाव के जरिये फिर संसद में लौटने की कोशिश कर रहे हैं।

क्यों खाली हुई नगांव सीट?

नगांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव की जरूरत तब पड़ी, जब तत्कालीन कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने लोकसभा और कांग्रेस दोनों से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया। इसके बाद उन्होंने विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर दिसपुर सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसी वजह से नगांव लोकसभा सीट खाली हुई। भाजपा अब इस सीट पर अपना कब्जा कायम करना चाहती है, जबकि कांग्रेस के लिए यह सीट वापस हासिल करने की चुनौती है। एआईयूडीएफ भी मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपने प्रभाव को फिर मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इस कारण मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।

15 उम्मीदवार, नौ निर्दलीय

निर्वाचन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नगांव उपचुनाव में कुल 15 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें भाजपा, कांग्रेस और एआईयूडीएफ के प्रमुख उम्मीदवारों के अलावा अन्य दलों के प्रत्याशी तथा नौ निर्दलीय उम्मीदवार शामिल हैं। तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार अब्दुल सलाम समेत तीन उम्मीदवारों ने नाम वापस ले लिया था।

मुद्दों के साथ आरोप-प्रत्यारोप भी

प्रचार अभियान के दौरान राजनीतिक दलों ने विकास, सरकारी योजनाओं, नागरिकता और स्थानीय मुद्दों के साथ एक-दूसरे पर तीखे राजनीतिक आरोप भी लगाए। चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में भाजपा, कांग्रेस और एआईयूडीएफ ने अपने-अपने समर्थक आधार को मजबूत करने पर जोर दिया। भाजपा की ओर से केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल समेत कई प्रमुख नेताओं ने प्रचार किया, जबकि कांग्रेस ने भी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ अभियान को तेज किया। नगांव का नतीजा केवल एक लोकसभा सीट का फैसला नहीं होगा, बल्कि विधानसभा चुनाव के बाद असम में बदलते राजनीतिक समीकरणों का भी संकेत देगा। खासकर भाजपा, कांग्रेस और एआईयूडीएफ के लिए यह चुनाव अपने-अपने राजनीतिक आधार और प्रभाव का परीक्षण बन गया है।

6 अक्टूबर को मतदान, 9 को परिणाम

नगांव लोकसभा सीट पर 6 अक्टूबर को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक मतदान होगा। प्रशासन ने शांतिपूर्ण मतदान के लिए सुरक्षा समेत आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। इसके बाद 9 अक्टूबर को मतगणना होगी और परिणाम सामने आएगा।

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