

लोकसभा में मंगलवार को ट्रांसजेंडर समुदाय से जुड़े ‘ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा के दौरान सांसदों ने भारतीय पौराणिक ग्रंथों के उदाहरण देते हुए अपने विचार रखे। बहस के दौरान Ramayana, Mahabharata और भगवान विष्णु के मोहिनी रूप जैसे प्रसंगों का उल्लेख किया गया।
तेलुगु देशम पार्टी की सांसद डॉ. बी. शबरी ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि उनके संसदीय क्षेत्र में ट्रांसजेंडर समुदाय का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व है, और शुभ अवसरों पर उनका आशीर्वाद लिया जाता है। उन्होंने Ramayana की एक कथा का जिक्र करते हुए बताया कि जब Lord Rama वनवास के लिए जा रहे थे, तो उन्होंने पुरुषों और महिलाओं को लौटने को कहा था।
शबरी के अनुसार, जब भगवान राम 14 वर्ष बाद लौटे, तो कुछ लोग उनका इंतजार करते मिले। पूछने पर उन्होंने कहा कि वे न तो पुरुष हैं और न ही महिलाएं, इसलिए उन्होंने आदेश का पालन नहीं किया और वहीं रुके रहे। इस पर भगवान राम ने किन्नर समुदाय को आशीर्वाद देने का वरदान दिया। सांसद ने कहा कि समाज में ट्रांसजेंडर समुदाय को ‘अर्द्धनारीश्वर’ और Brihannala के रूप में भी देखा जाता है।
कांग्रेस सांसद गोवाल पडवी ने भी चर्चा में भाग लेते हुए Mahabharata के प्रसंगों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कैसे Arjuna ने अज्ञातवास के दौरान बृहन्नला का रूप धारण किया था। इसके साथ ही उन्होंने समुद्र मंथन की कथा का जिक्र करते हुए Mohini अवतार का भी उल्लेख किया, जिसमें भगवान विष्णु ने स्त्री रूप धारण किया था।
हालांकि, पडवी ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि उनकी आपत्ति सुधारों से नहीं है, बल्कि वे अधिक सशक्त और व्यापक कानून चाहते हैं। उन्होंने मांग की कि इस मुद्दे पर ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों से व्यापक परामर्श किया जाना चाहिए, ताकि कानून उनके वास्तविक हितों की रक्षा कर सके।
चर्चा के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि सांसद सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भों के जरिए इस विषय की संवेदनशीलता और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को उजागर करना चाहते हैं, हालांकि विधेयक के स्वरूप को लेकर मतभेद भी सामने आए।