

अबू धाबी : पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने संयुक्त अरब अमीरात के साथ भारत की मजबूती से खड़े रहने की बात दोहराई। उन्होंने कहा कि Strait of Hormuz को “फ्री, ओपन और सुरक्षित” रहना चाहिए और यूएई पर हुए हमलों को “अस्वीकार्य” बताया।
अपने संक्षिप्त लेकिन अहम दौरे के दौरान पीएम मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति Mohamed bin Zayed Al Nahyan (MBZ) से मुलाकात की। इस दौरान भारत ने यूएई के साथ “कंधे से कंधा मिलाकर” खड़े रहने का भरोसा दिया और क्षेत्र में शांति बहाली के प्रयासों का समर्थन किया।
करीब तीन घंटे के इस दौरे में दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते हुए। इनमें रणनीतिक रक्षा साझेदारी का फ्रेमवर्क, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और एलपीजी से जुड़े समझौते शामिल हैं। इसके अलावा गुजरात के वाडिनार में शिप रिपेयर क्लस्टर स्थापित करने पर भी सहमति बनी। भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर, RBL Bank और Samman Capital में करीब 5 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान किया गया।
प्रधानमंत्री ने इस दौरान कहा कि भारत “संवाद और कूटनीति” के पक्ष में है, क्योंकि क्षेत्रीय संघर्ष का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। उन्होंने कठिन समय में नेतृत्व दिखाने के लिए यूएई राष्ट्रपति की सराहना की और वहां रह रहे भारतीय समुदाय का ध्यान रखने के लिए धन्यवाद भी दिया।
ऊर्जा सुरक्षा इस दौरे का प्रमुख फोकस रही। अधिकारियों के अनुसार, यूएई भारत की ऊर्जा जरूरतों में अहम भूमिका निभाता है। कच्चे तेल की आपूर्ति में यूएई भारत का प्रमुख स्रोत है, जबकि एलपीजी की लगभग 40% जरूरत वहीं से पूरी होती है।
गौरतलब है कि Indian Strategic Petroleum Reserves Limited (ISPRL) और Abu Dhabi National Oil Company (ADNOC) के बीच पहले से समझौते के तहत भारत में कच्चे तेल का भंडारण भी किया जा रहा है, जो आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच जारी युद्ध ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। यूएई पर भी मिसाइल हमलों का खतरा बना हुआ है। ऐसे में भारत के लिए यह साझेदारी और भी अहम हो गई है।
अपने इस दौरे के बाद पीएम मोदी यूरोप के चार देशों की यात्रा पर रवाना हो गए, जहां वे द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकों में हिस्सा लेंगे।