ममता बनर्जी ने सागर द्वीप को जोड़ने वाले ‘गंगासागर सेतु’ की रखी आधारशिला

पुल के निर्माण पर 1,670 करोड़ रुपये की लागत आएगी जिसे ‘गंगासागर सेतु’ नाम दिया गया है।
ममता बनर्जी ने सागर द्वीप को जोड़ने वाले ‘गंगासागर सेतु’ की रखी आधारशिला
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सागर द्वीपः पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को सागर द्वीप को जोड़ने के लिए मूड़ीगंगा नदी पर लगभग पांच किलोमीटर लंबे पुल की आधारशिला रखी। सागर द्वीप पर ही वार्षिक गंगासागर मेला आयोजित किया जाता है।

इस पुल के निर्माण पर 1,670 करोड़ रुपये की लागत आएगी जिसे ‘गंगासागर सेतु’ नाम दिया गया है। यह पुल हुगली नदी और बंगाल की खाड़ी के संगम पर स्थित सागर द्वीप को हर मौसम में सड़क संपर्क उपलब्ध कराएगा।

दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित सागर द्वीप पर हर साल देशभर से लाखों श्रद्धालु 14 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर संगम में स्नान करने और कपिल मुनि मंदिर में पूजा-अर्चना करने के लिए पहुंचते हैं।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री की मौजूदगी में पश्चिम बंगाल सरकार और निर्माण कार्य का ठेका पाने वाली कंपनी ‘लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड’ (एलएंडटी) के बीच दस्तावेजों का औपचारिक आदान-प्रदान किया गया। अधिकारियों ने बताया कि उम्मीद है कि पुल का निर्माण दो वर्षों के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। फिलहाल सागर द्वीप तक केवल नौका सेवाओं के माध्यम से पहुंचना संभव है, जो गंगासागर मेले के दौरान तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ और ज्वार-भाटे की स्थिति के कारण अक्सर बाधित हो जाती हैं।

सेतु का विवरण और बजट

मुड़िगंगा नदी पर बनने वाले इस गंगासागर सेतु का निर्माण एलएंडटी (L&T) करेगी। सागर द्वीप को मुख्य भूमि से जोड़ने वाले इस सेतु की लंबाई लगभग 4 किलोमीटर होगी, जबकि अप्रोच रोड सहित कुल लंबाई करीब 5 किलोमीटर होगी। चार लेन का यह सेतु एक ओर काकद्वीप के लॉट-8 और दूसरी ओर कचुबेरिया से जुड़ेगा। परियोजना का नोडल विभाग लोक निर्माण विभाग है। इसकी अनुमानित लागत लगभग 1,700 करोड़ रुपये है। शुरुआत में परियोजना का बजट 1,000 से 1,200 करोड़ रुपये के बीच था, जो समय के साथ बढ़कर 1,700 करोड़ रुपये हो गया। पूरा होने पर यह राज्य की नदियों पर बना सबसे बड़ा सेतु होगा।

स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं को लाभ

सेतु चालू होने के बाद आवागमन में सबसे बड़ा लाभ होगा। अब तक नदी पार करने के लिए नौकाओं और जहाजों (वेसेल) पर निर्भर रहना पड़ता था, जिसमें काफी समय लगता था। ज्वार-भाटा पर निर्भर इस व्यवस्था में भाटा के समय सागर द्वीप लगभग कट-सा जाता था। सेतु बनने से यह अनिश्चितता काफी हद तक समाप्त होगी और गंगासागर व मुख्य भूमि के बीच स्थायी संपर्क स्थापित होगा।

गंगासागर का भौगोलिक महत्व

गंगासागर का भौगोलिक महत्व भी कम नहीं है। कभी लगभग 300 वर्ग किलोमीटर में फैला यह क्षेत्र कटाव के कारण सिमटकर करीब 233 वर्ग किलोमीटर रह गया है। यहाँ प्रति वर्ग किलोमीटर लगभग साढ़े सात सौ लोग रहते हैं। कुल गाँवों की संख्या लगभग 43 है और जनसंख्या करीब 1 लाख 90 हजार से 2 लाख 10 हजार के बीच मानी जाती है। दूरदराज़ क्षेत्र होने के बावजूद यहाँ साक्षरता दर 84 प्रतिशत से अधिक है, जो कृषि-प्रधान इलाके के लिए उल्लेखनीय है।

राष्ट्रीय मेला का दर्जा क्यों नहीं?

अतीत में मुख्यमंत्री कई बार सवाल उठा चुकी हैं कि यदि उत्तर प्रदेश का कुंभ मेला ‘राष्ट्रीय मेला’ हो सकता है, तो करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े गंगासागर मेले को यह दर्जा क्यों नहीं मिल सकता। लेकिन अब तक दिल्ली से इस मांग पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिली। अंततः 2023 में सागर की धरती से ही मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि केंद्र की ओर देखने के बजाय राज्य सरकार अपने दम पर गंगासागर सेतु बनाएगी। तमाम बाधाओं के बाद अब शिलान्यास के साथ मुख्यमंत्री का यह सपना साकार होने की दिशा में है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोमवार को मुख्यमंत्री राष्ट्रीय मेला की मान्यता की मांग को लेकर एक बार फिर मुखर हो सकती हैं।

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