

मुंबईः भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बृहस्पतिवार को कहा कि बैंक के आचरण या शासन के संबंध में कोई बड़ी चिंता की बात नहीं है। एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के नैतिक चिंताओं का हवाला देते हुए इस्तीफा देने के कुछ घंटों बाद केंद्रीय बैंक ने यह बात कही।
आरबीआई ने बयान में कहा, ‘‘ एचडीएफसी बैंक एक घरेलू प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण बैंक (डी-एसआईबी) है जिसके पास मजबूत वित्तीय स्थिति, पेशेवर तरीके से संचालित बोर्ड और सक्षम प्रबंधन दल है। हमारे समय-समय पर किए गए आकलन के आधार पर, इसके आचरण या शासन के संबंध में कोई बड़ी चिंता नहीं है।’’ बयान में जोर दिया गया कि बैंक के पास पर्याप्त पूंजी है और उसकी वित्तीय स्थिति संतोषजनक बनी हुई है। साथ ही पर्याप्त नकदी भी मौजूद है।
यह बयान देश के दूसरे सबसे बड़े ऋणदाता एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के 18 मार्च 2026 से अचानक इस्तीफे देने के बाद आया है। उन्होंने नैतिक चिंताओं का हवाला दिया था। यह पहली बार है जब एचडीएफसी बैंक के किसी अंशकालिक चेयरमैन ने कार्यकाल के बीच में पद छोड़ा है जिससे इसके कामकाज को लेकर चिंताएं उठी हैं।
आरबीआई ने बैंक के अनुरोध पर उसके अंशकालिक चेयरमैन के पद को लेकर एक अंतरिम व्यवस्था को मंजूरी दी है। एचडीएफसी बैंक के आवेदन पर भारतीय रिजर्व बैंक ने 18 मार्च 2026 को केकी मिस्त्री को 19 मार्च 2026 से तीन महीने की अवधि के लिए अंतरिम अंशकालिक चेयरमैन नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। बयान में कहा गया है कि आरबीआई आगे की कार्रवाई को लेकर निदेशक मंडल और प्रबंधन के साथ जुड़ा रहेगा।
एचडीएफसी लिमिटेड का एचडीएफसी बैंक में विलय एक जुलाई, 2023 से प्रभावी हुआ जिससे 18 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संयुक्त बही-खाते वाली एक विशाल वित्तीय इकाई का निर्माण हुआ।