भारतीय सेना का बड़ा कदम: मोर्टार स्पेशलिस्ट व्हीकल से फायरिंग होगी और सटीक व तेज

भारतीय सेना ने स्वदेशी मोर्टार स्पेशलिस्ट व्हीकल के लिए जानकारी मांगी, ऑटोमेशन, डिजिटल फायर कंट्रोल और ‘शूट एंड स्कूट’ क्षमता से दुश्मन पर तेज, सटीक और सुरक्षित वार की तैयारी
नई प्रणाली में बैलिस्टिक कंप्यूटर सामने से मिली टारगेट जानकारी के आधार पर खुद ही फायरिंग एंगल और दिशा तय करेगा
सेना ने देश की रक्षा कंपनियों से एक नए मोर्टार स्पेशलिस्ट व्हीकल (MSV) के लिए जानकारी मांगी है
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भारतीय सेना (Indian Army) अपनी फायर सपोर्ट क्षमता को आधुनिक बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठा रही है। सेना ने देश की रक्षा कंपनियों से एक नए मोर्टार स्पेशलिस्ट व्हीकल (MSV) के लिए जानकारी मांगी है, जो युद्धक्षेत्र में गोलाबारी को अधिक तेज, सटीक और सुरक्षित बनाने में मदद करेगा।

प्रस्तावित सिस्टम एक पहियों पर आधारित आधुनिक सैन्य वाहन होगा, जिसमें मॉर्टार हथियार प्रणाली को पूरी तरह ऑटोमेशन और डिजिटल तकनीक से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य पारंपरिक मैन्युअल फायरिंग प्रक्रिया की जटिलता को कम करना और तेजी से लक्ष्य भेदने की क्षमता बढ़ाना है।

कंप्यूटर करेगा फायरिंग की पूरी गणना

नई प्रणाली में एक बैलिस्टिक कंप्यूटर लगाया जाएगा, जो सामने से मिली टारगेट जानकारी के आधार पर खुद ही फायरिंग एंगल और दिशा तय करेगा। इससे निशाने की सटीकता बढ़ेगी, गोला-बारूद की खपत कम होगी, प्रतिक्रिया समय तेज होगा, मानवीय त्रुटियों की संभावना घटेगी और “शूट एंड स्कूट” से दुश्मन को चकमा दिया जा सकेगा।

इस वाहन की सबसे बड़ी खासियत इसकी “शूट एंड स्कूट” क्षमता होगी। यानी फायरिंग के तुरंत बाद वाहन अपनी स्थिति बदल सकेगा, जिससे दुश्मन की जवाबी कार्रवाई से बचाव आसान हो जाएगा। वाहन में केवल दो सैनिकों के संचालन की व्यवस्था होगी और यह लगभग 54 मॉर्टार गोले साथ ले जाने में सक्षम होगा।

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ऊंचाई और कठिन मौसम में भी सक्षम

सेना ने इस सिस्टम के लिए बेहद कठिन ऑपरेशनल शर्तें तय की हैं। वाहन को हाईवे पर 80 किमी/घंटा और सामान्य सड़क पर 40 किमी/घंटा की गति, 17,000 फीट तक की ऊंचाई पर संचालन क्षमता, -25°C से +50°C तापमान में काम करने की योग्यता के साथ दुर्गम इलाकों में 250 किमी और सड़क पर 400 किमी की रेंज जैसी परिस्थितियों में काम करने योग्य होना होगा। यह आवश्यकता विशेष रूप से चीन सीमा (China सीमा क्षेत्र) और हिमालयी तैनाती को ध्यान में रखकर तय की गई है।

एंटी-ड्रोन सुरक्षा और आधुनिक तकनीक

बदलते युद्ध परिदृश्य को देखते हुए वाहन में ड्रोन से सुरक्षा के लिए एंटी-ड्रोन सिस्टम भी लगाया जाएगा। इसके अलावा इसमें बैलिस्टिक सुरक्षा कवच, टचस्क्रीन आधारित नियंत्रण प्रणाली और आधुनिक सैन्य संचार तकनीक जैसी सुविधाएं भी शामिल होंगी।

वैश्विक मानकों के करीब पहुंचता भारत

यह परियोजना भारतीय सेना के व्यापक आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा है। पिछले कुछ वर्षों में सेना ने कई आधुनिक हथियार प्रणालियां शामिल की हैं, जिनमें स्वदेशी एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS) और पिनाका रॉकेट सिस्टम जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं।

दक्षिण कोरिया, तुर्की और इजराइल जैसे देश पहले से ही स्वचालित मॉर्टार सिस्टम का उपयोग कर रहे हैं। खासतौर पर इज़राइल का कार्डोम 120 मिमी सिस्टम इस तकनीक का सफल उदाहरण माना जाता है।

अब भारत भी इसी दिशा में स्वदेशी और आधुनिक समाधान विकसित कर अपनी मारक क्षमता और युद्ध दक्षता दोनों बढ़ाने की तैयारी में है।

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