

ग्वालियरः केंद्र सरकार के संस्थान लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान (एलएनआईपीई) के गुवाहाटी परिसर में बीपीएड की छात्रा की मौत के बाद शुरू हुआ छात्र आंदोलन मंगलवार को और उग्र हो गया। आंदोलन कर रहे छात्रों ने शाम को संस्थान के प्रशासनिक भवन को बंद कर दिया। उस समय भवन के अंदर कुलपति प्रो. कल्पना शर्मा सहित कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे। करीब दो घंटे तक प्रशासनिक भवन बंद रहने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और कुलपति समेत अन्य लोगों को बाहर निकाला।
छात्र पिछले 14 दिनों से विभिन्न मांगों को लेकर एलएनआईपीई के ग्वालियर मुख्य परिसर में प्रदर्शन कर रहे हैं। बुधवार सुबह प्रदर्शनकारी छात्रों में से चार ने भूख हड़ताल भी शुरू कर दी। छात्रों की प्रमुख मांगों में संस्थान के रजिस्ट्रार का इस्तीफा, मृत छात्रा के परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा और गुवाहाटी परिसर में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करना शामिल है।
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि लगातार आंदोलन के बावजूद उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई, जिसके कारण मंगलवार को छात्रों का आक्रोश बढ़ गया और उन्होंने प्रशासनिक भवन को बंद कर दिया।
एलएनआईपीई के गुवाहाटी परिसर में बीपीएड तृतीय वर्ष की छात्रा श्रुति उपाध्याय (22) की 9 सितंबर को बीमारी के बाद मौत हो गई थी। छात्रों का आरोप है कि उसे समय पर समुचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिल सकी। घटना के बाद गुवाहाटी परिसर में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने सहित कई मांगों को लेकर ग्वालियर स्थित मुख्य परिसर में आंदोलन शुरू किया गया।
छात्रों का कहना है कि परिसर में विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त चिकित्सा व्यवस्था और आपातकालीन स्थिति से निपटने की सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।
प्रदर्शनकारी छात्र अमित चौधरी ने संवाददाताओं से कहा कि छात्र पिछले 14 दिनों से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। उनके मुताबिक, संस्थान की ओर से छात्रों पर प्रदर्शन खत्म कर कक्षाओं में लौटने का दबाव बनाया जा रहा है।
चौधरी ने बताया कि संस्थान की ओर से उन्हें आश्वासन दिया गया है कि दिल्ली से एक टीम 24 सितंबर को ग्वालियर आएगी और छात्रों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनेगी। उन्होंने कहा कि छात्र 24 सितंबर तक इंतजार करेंगे। इसके बाद भी यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
छात्रों के अनुसार उनकी ओर से संस्थान के सामने छह मांगें रखी गई हैं। इनमें गुवाहाटी परिसर की चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करना, जिम्मेदारी तय करना, रजिस्ट्रार के इस्तीफे और मृत छात्रा के परिवार को 50 लाख रुपये के मुआवजे जैसी मांगें शामिल हैं।
छात्रों का कहना है कि संस्थान चिकित्सा सुविधाओं में सुधार की दिशा में कदम उठा रहा है, लेकिन रजिस्ट्रार के इस्तीफे और मुआवजे की मांग पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
कुलपति प्रो. कल्पना शर्मा ने कहा कि संस्थान की ओर से छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन पर कोई रोक नहीं है। हालांकि, मंगलवार शाम प्रदर्शन के दौरान प्रशासनिक भवन को बंद करना उचित नहीं था। उनके मुताबिक, छात्रों से लगातार बातचीत की जा रही है और उनकी छह मांगों में से कुछ को स्वीकार किया जा चुका है, जबकि बाकी मांगों पर विचार के लिए समिति गठित की गई है।
कुलपति ने कहा कि संस्थान छात्रों से कक्षाओं में लौटकर अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए कह रहा है, ताकि आंदोलन के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।
कुलपति के अनुसार, मृत छात्रा के परिवार को असम सरकार की ओर से चार लाख रुपये की सहायता दी गई है, जबकि संस्थान ने मुआवजे के रूप में पांच लाख रुपये दिए हैं। इस तरह परिवार को अब तक कुल नौ लाख रुपये की सहायता दिए जाने की बात संस्थान की ओर से कही गई है।
हालांकि, छात्र 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग पर कायम हैं। उनका कहना है कि इस मांग पर भी संस्थान को स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।
छात्रों और संस्थान के बीच जारी गतिरोध के बीच अब 24 सितंबर को दिल्ली से प्रस्तावित टीम के ग्वालियर पहुंचने और छात्रों से बातचीत को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। छात्र प्रतिनिधि पहले ही कह चुके हैं कि वे टीम के साथ बातचीत का इंतजार करेंगे। बातचीत से यदि उनकी मांगों पर कोई ठोस सहमति नहीं बनती है तो आंदोलन को आगे बढ़ाने की चेतावनी भी छात्रों ने दी है।
इस बीच संस्थान प्रशासन का जोर छात्रों को शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने और कक्षाओं में वापस लौटने पर है। छात्र आंदोलन और प्रशासन के बीच अगले दौर की बातचीत से ही यह स्पष्ट होगा कि गतिरोध किस दिशा में आगे बढ़ता है।