लता मंगेशकर की आवाज पहुंची अमेरिका, फिर छिड़ी करोड़ों की Copyright जंग

‘थोड़ा रेशम लगता है’ से ‘Addictive’ तक का सफर, बिना Permission इस्तेमाल हुई धुन ने पहुंचाया मामला अदालत तक
लता मंगेशकर की आवाज और संगीत की विरासत में दर्ज ‘थोड़ा रेशम लगता है’ से लेकर ‘लग जा गले’ तक के सदाबहार गीत।
लता मंगेशकर की आवाज और संगीत की विरासत में दर्ज ‘थोड़ा रेशम लगता है’ से लेकर ‘लग जा गले’ तक के सदाबहार गीत।Ai generated image
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भारतीय फिल्म संगीत की धुनें सीमाओं के पार पहुंचकर दुनिया भर के संगीतकारों को प्रभावित करती रही हैं। लेकिन कभी-कभी यह प्रभाव कानूनी विवाद में भी बदल जाता है। भारत रत्न से सम्मानित लता मंगेशकर, जिनकी आवाज भारतीय संगीत की सबसे बड़ी पहचान में शुमार रही, के स्वर में रिकॉर्ड हुआ 1981 की फिल्म ज्योति (Jyoti) का गीत ‘थोड़ा रेशम लगता है’ इसका चर्चित उदाहरण है। बप्पी लाहिड़ी के संगीत और आनंद बख्शी के बोल वाला यह गीत दो दशक बाद अमेरिकी हिप-हॉप की दुनिया में पहुंचा और फिर कॉपीराइट (copyright) की बड़ी लड़ाई खड़ी हो गई।

2002 में अमेरिकी आरएंडबी गायिका Truth Hurts का गीत Addictive रिलीज हुआ। इसके निर्माण में DJ Quik और Dr. Dre से जुड़े प्रोडक्शन की भूमिका थी। गीत में ‘थोड़ा रेशम लगता है’ के हिस्से का इस्तेमाल किया गया था। समस्या यह थी कि इस सैंपल के लिए मूल अधिकारधारकों से अनुमति नहीं ली गई थी। उस समय Addictive तेजी से लोकप्रिय हुआ और अमेरिकी चार्ट पर शीर्ष 10 में पहुंचा।

मामला सामने आने के बाद भारतीय संगीत कंपनी Saregama ने अमेरिकी रिकॉर्ड कंपनियों और प्रोडक्शन पक्ष के खिलाफ लगभग 500 मिलियन डॉलर का कॉपीराइट मुकदमा दायर किया। भारतीय मीडिया में इसकी राशि आज करीब 4000 करोड़ रुपये बताई जाती है। लेकिन यहां एक जरूरी तथ्य स्पष्ट करना चाहिए, यह 4000 करोड़ रुपये का लगाया गया जुर्माना नहीं था, बल्कि मुकदमे में मांगी गई रकम थी।

फरवरी 2003 में लॉस एंजिल्स की संघीय अदालत ने Addictive की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश दिया। शर्त यह थी कि आगे बिक्री तभी हो सकती है जब बप्पी लाहिड़ी को गीत के क्रेडिट में शामिल किया जाए। उस समय तक Truthfully Speaking की लगभग छह लाख प्रतियां बिकने की खबरें सामने आ चुकी थीं।

इसके बाद बप्पी लाहिड़ी और Saregama की ओर से अलग-अलग कानूनी दावे भी सामने आए। 2007 के एक अमेरिकी अदालती फैसले में लाहिड़ी और Saregama को गीत के कॉपीराइट का सह-स्वामी माना गया था, जबकि बाद की कार्यवाही में लाहिड़ी के क्रेडिट संबंधी दावे पर अलग निष्कर्ष आया। कानूनी दस्तावेजों के अनुसार Saregama और संबंधित पक्षों के बीच विवाद अंततः समझौते से निपटा।

दिलचस्प बात यह भी है कि इसी विवाद के बाद ‘थोड़ा रेशम लगता है’ की धुन नए रूप में भारत में भी लौटी। हैरी आनंद ने कलियों का चमन तैयार किया, जिसने अपनी अलग पहचान बनाई। यानी जिस धुन ने विदेश में कॉपीराइट विवाद पैदा किया, वही धुन आगे चलकर भारतीय पॉप संस्कृति में एक नए अंदाज में फिर लोकप्रिय हुई।

इस पूरे प्रकरण की सबसे बड़ी सीख यही है कि संगीत की कोई सीमा नहीं होती, लेकिन सैंपलिंग की एक कानूनी सीमा जरूर होती है। लता की आवाज और बप्पी लाहिड़ी की धुन ने अमेरिकी संगीतकारों को आकर्षित किया, मगर बिना अनुमति इस्तेमाल ने यह भी साबित कर दिया कि किसी पुराने गीत की लोकप्रियता उसे सार्वजनिक संपत्ति नहीं बना देती।

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