

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडर शेख यूसुफ अफरीदी की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। सुरक्षा एजेंसियों ने इस घटना को ‘टारगेट किलिंग’ करार दिया है।
जानकारी के अनुसार, अफरीदी पर उस समय हमला किया गया जब वह खैबर पख्तूनख्वा के एक इलाके में मौजूद था। अचानक पहुंचे हमलावरों ने उस पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं, जिससे उसे बचने का मौका नहीं मिला और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। हमले के बाद हमलावर पहाड़ी क्षेत्र की ओर फरार हो गए। अभी तक किसी भी संगठन ने इस हत्या की जिम्मेदारी नहीं ली है।
अफरीदी को लश्कर-ए-तैयबा के प्रांतीय स्तर के सबसे प्रभावशाली कमांडरों में गिना जाता था और वह संगठन के खैबर पख्तूनख्वा नेटवर्क का प्रमुख था। बताया जाता है कि वह हाफिज मोहम्मद सईद का करीबी सहयोगी था और आतंकी गतिविधियों की योजना बनाने में उसकी अहम भूमिका रहती थी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अफरीदी स्थानीय मदरसों, मस्जिदों और कबीलाई नेटवर्क के जरिए युवाओं की भर्ती करता था और उन्हें जम्मू-कश्मीर में हमलों के लिए भेजता था। वह कट्टर अहले-हदीस (सलाफी) विचारधारा से जुड़ा हुआ था, जिसके चलते वह कई विरोधी गुटों के निशाने पर भी था।
इस घटना को लश्कर-ए-तैयबा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि इससे संगठन का स्थानीय नेटवर्क कमजोर पड़ सकता है। साथ ही, हाल के महीनों में पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों—लाहौर, कराची, पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा—में आतंकी संगठनों से जुड़े लोगों पर हमलों में बढ़ोतरी देखी गई है, जो आंतरिक टकराव की ओर इशारा करती है।