

निधि, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान से पहले कोलकाता की लाइफलाइन मानी जाने वाली बस सेवा चरमरा गई है। चुनाव ड्यूटी के लिए बसों के अधिग्रहण के कारण शहर की सड़कों से लगभग 50% बसें गायब हो गई हैं, जिससे आम जनता और दैनिक यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
गुरुवार को होने वाले पहले चरण के मतदान के लिए प्रशासन ने सोमवार से ही बसों को अपने नियंत्रण में लेना शुरू कर दिया था। बस यूनियनों के अनुसार, कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों में रोजाना लगभग 3,000 निजी बसें चलती हैं। इनमें से करीब 1,600 बसें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) और पुलिस कर्मियों को लाने-ले जाने के लिए अधिग्रहित कर ली गई हैं। आने वाले चरणों (25 और 27 अप्रैल) के लिए और भी बसों की मांग बढ़ने की संभावना है।
'सिटी सबअर्बन बस सर्विस' के महासचिव टीटू साहा ने बसों के अत्यधिक उपयोग पर चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि सामान्य दिनों में एक बस 140 से 200 किलोमीटर चलती है, लेकिन चुनाव ड्यूटी के दौरान उन्हें 500 से 600 किलोमीटर तक चलाया जा सकता है। इससे बसों की मैकेनिकल स्थिति खराब होने का डर है। बस यूनियनों ने परिवहन विभाग के सचिव को पत्र लिखकर मांग की है कि यात्रियों की सुविधा के लिए कम से कम 40% बसें सड़कों पर रहने दी जाएं।
सड़कों पर बसों की संख्या कम होने से बस स्टॉप पर यात्रियों की भारी भीड़ देखी जा रही है। चिलचिलाती गर्मी में लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, और जो बसें आ रही हैं, उनमें तिल धरने की जगह नहीं है। ऑफिस जाने वाले लोगों का कहना है कि ऑटो और टैक्सी वाले भी इस स्थिति का फायदा उठाकर मनमाना किराया वसूल रहे हैं।