

आम आदमी पार्टी के प्रमुख और पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आबकारी नीति मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायाधीश स्वर्ण कांता शर्मा के समक्ष रिक्यूजल अर्जी दाखिल की है। पार्टी के अनुसार केजरीवाल सोमवार को इस मामले में खुद भी दलील पेश करेंगे।
यह मामला उस समय सामने आया जब दिल्ली हाईकोर्ट ने 16 मार्च को केजरीवाल और अन्य आरोपियों को सीबीआई की याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया था। सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट द्वारा केजरीवाल और 22 अन्य लोगों को राहत दिए जाने के फैसले को चुनौती दी है और इस मामले की सुनवाई छह अप्रैल को तय की गई है।
इस कदम पर भाजपा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह न्यायपालिका के प्रति सम्मान की कमी को दर्शाता है। दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि केजरीवाल सभी मोर्चों पर निराश हो चुके हैं और अब जज से ही मामले से अलग होने की मांग कर रहे हैं।
इससे पहले 11 मार्च को केजरीवाल और अन्य आरोपियों ने दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय को पत्र लिखकर मामले को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच से स्थानांतरित करने की मांग की थी। उन्होंने सुनवाई में निष्पक्षता को लेकर आशंका जताई थी, लेकिन 13 मार्च को यह अनुरोध खारिज कर दिया गया।
गौरतलब है कि 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य को आबकारी नीति मामले में बरी करते हुए कहा था कि सीबीआई के पास प्रथम दृष्टया भी कोई ठोस सबूत नहीं है। कोर्ट ने जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच के निर्देश भी दिए थे।
इसके बाद सीबीआई ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर कर ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी और कहा कि अदालत ने एजेंसी द्वारा जुटाए गए सबूतों को नजरअंदाज किया है। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई जारी रखते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी थी।