

कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार की महत्त्वाकांक्षी 'जलस्वप्न' परियोजना, जो कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दिमाग की उपज है वित्तीय संकट के चलते अधर में लटक गई है। राज्य सरकार का दावा है कि केंद्र सरकार यदि समय पर अपनी हिस्सेदारी का फंड देती, तो आज राज्य के हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना संभव होता।
मंगलवार को जनस्वास्थ्य और तकनीकी विभाग के सूत्रों के अनुसार, अब तक राज्य ने इस परियोजना के तहत एक करोड़ से अधिक ग्रामीण घरों तक पाइपलाइन के माध्यम से जल आपूर्ति सुनिश्चित की है। लेकिन केंद्र की तरफ से फंडिंग रुक जाने के कारण लगभग 40 प्रतिशत घरों तक पानी पहुंचाने का कार्य अधूरा रह गया है।
नवान्न सुत्रो के ज़रीये बताया गया है कि केंद्र सरकार ने अगस्त 2024 से 'जलस्वप्न' योजना के लिए फंड जारी करना बंद कर दिया है, जिससे राज्य को अब तक करीब 2,500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। राज्य सरकार अब इस परियोजना को आगे कैसे बढ़ाया जाए, इस पर विचार कर रही है।