

गुवाहाटी : असम के पर्यावरण एवं वन मंत्री जयंत मल्ल बरुआ ने शनिवार को जोरहाट मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती पद्मश्री से सम्मानित जादव पायेंग से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। पायेंग को ‘भारत के वन पुरुष’ के नाम से जाना जाता है। तेज बुखार और सांस लेने में परेशानी के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। चिकित्सकों के अनुसार फिलहाल उनकी हालत स्थिर है। पायेंग की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें बृहस्पतिवार को जोरहाट मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों के मुताबिक तेज बुखार के कारण उनके शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम हो गया था और उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। इसके बाद उन्हें अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में रखा गया। उपचार के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ है और अब वह चिकित्सकीय निगरानी में हैं।
चिकित्सकों से इलाज की जानकारी ली
मंत्री जयंत मल्ल बरुआ ने अस्पताल पहुंचकर पायेंग से मुलाकात की और उनका हाल जाना। उन्होंने पायेंग का इलाज कर रहे चिकित्सकों तथा अस्पताल के अधीक्षक से भी बातचीत कर उपचार और स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली। बरुआ ने सोशल मीडिया पर कहा कि काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान को दोबारा पर्यटकों के लिए खोले जाने के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद उन्होंने अस्पताल जाकर पायेंग से मुलाकात की। उन्होंने पायेंग के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। मंत्री ने बाद में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि असम सरकार जादव पायेंग के इलाज का पूरा खर्च वहन करेगी। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक वानिकी के क्षेत्र में पायेंग के योगदान को महत्वपूर्ण बताया।
हजारों पेड़ लगाकर बनाई ‘मोलाई फॉरेस्ट’
जादव पायेंग असम के जोरहाट जिले के रहने वाले पर्यावरणविद् हैं। उन्होंने ब्रह्मपुत्र नदी के एक रेतीले द्वीप पर वर्षों तक पेड़ लगाकर और उनकी देखभाल कर एक विशाल वन क्षेत्र विकसित किया, जिसे बाद में ‘मोलाई फॉरेस्ट’ के नाम से जाना गया। उनके पर्यावरण संरक्षण के कार्यों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। पेड़ लगाने और सामाजिक वानिकी के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था। उनका जीवन पर्यावरण संरक्षण और वनीकरण के प्रति लंबे समय से जारी प्रयासों के लिए जाना जाता है।