

ईरान-इजरायल युद्ध अब उस मुहाने पर आ गया है जहाँ से पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) खतरे में है। बुधवार को इजरायली एयरफोर्स ने ईरान के सबसे बड़े गैस फील्ड 'साउथ पार्स' को निशाना बनाकर मिडिल ईस्ट के समीकरण बदल दिए हैं।
ऐतिहासिक हमला: पहली बार अमेरिका-इजरायल गठबंधन ने ईरान के प्राकृतिक गैस ठिकानों को सीधे निशाना बनाया है।
साउथ पार्स पर प्रहार: दक्षिणी बुशहर प्रांत के असालुयेह (Asaluyeh) में स्थित गैस फैसिलिटीज से धुएं के गुबार और आग की लपटें उठती देखी गईं।
खाड़ी देशों को अल्टीमेटम: गुस्से में आए ईरान ने सऊदी अरब, कतर और यूएई के तेल-गैस ठिकानों को उड़ाने की खुली धमकी दी है।
इजरायल की रणनीति साफ है—ईरान की आर्थिक कमर तोड़ना। पहले तेल टर्मिनल 'खार्ग आइलैंड' और अब 'साउथ पार्स' पर हमला, ईरान के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है।
दुनिया का सबसे बड़ा खजाना: साउथ पार्स और कतर का नॉर्थ फील्ड मिलकर दुनिया का सबसे बड़ा गैस फील्ड बनाते हैं। इसमें करीब 1800 ट्रिलियन क्यूबिक फीट गैस का भंडार है।
दुनिया की ऊर्जा जरूरत: इस अकेले फील्ड में इतनी गैस है कि पूरी दुनिया की ऊर्जा जरूरतें 13 साल तक या बिजली उत्पादन 35 साल तक निर्बाध रूप से चल सकता है।
विशाल इलाका: यह 9700 वर्ग किमी में फैला है, जिसका 3700 वर्ग किमी हिस्सा ईरान (साउथ पार्स) के नियंत्रण में है। ईरान यहाँ से रोजाना 700 मिलियन क्यूबिक मीटर गैस निकालता है।
ईरानी मिलिट्री के ऑपरेशनल कमांडर खातम अल अनबिया ने इस हमले के बाद जो बयान जारी किया है, उसने वैश्विक बाजारों में हड़कंप मचा दिया है। ईरान ने साफ कहा है कि वह इजरायल की मदद करने वाले या चुप रहने वाले पड़ोसियों को नहीं बख्शेगा।
सऊदी अरब: सामरेफ रिफाइनरी और जुबैल पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स निशाने पर।
यूएई: अल हसन गैस फील्ड को उड़ाने की धमकी।
कतर: पेट्रोकेमिकल प्लांट और रिफाइनरियां ईरान की हिट लिस्ट में।
कतर का स्टैंड: कतर ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद अल अंसारी ने इसे 'गैर-जिम्मेदाराना' करार देते हुए कहा कि ऊर्जा ठिकानों पर हमले से पूरी दुनिया का पर्यावरण और सुरक्षा खतरे में है।
हमले की खबर आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों ने लंबी छलांग लगाई है।
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें बुधवार को ही 4% से ज्यादा उछल गईं।
कीमतें 108.60 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई हैं।
विशेषज्ञों की राय: अगर ईरान ने अपनी धमकी पर अमल किया और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली सप्लाई बाधित हुई, तो तेल की कीमतें 150 डॉलर के पार जा सकती हैं, जिससे भारत समेत पूरी दुनिया में महंगाई का नया दौर शुरू हो जाएगा।