

सप्ताहांत में इज़राइल द्वारा ईरान की तेल भंडारण सुविधाओं पर किए गए हमलों ने मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ा दिया है। इन हमलों के कारण भीषण आग लग गई और कम से कम चार लोगों की मौत हो गई। अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों ने अमेरिका और इज़राइल के बीच भी असहमति पैदा कर दी है। यह 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध के बाद दोनों सहयोगियों के बीच पहली बड़ी नाराज़गी मानी जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इज़राइल ने हमले से पहले वॉशिंगटन को इसकी जानकारी दी थी और दावा किया था कि इन तेल भंडारण स्थलों का इस्तेमाल मिसाइल हमलों के लिए ईंधन उपलब्ध कराने में हो रहा था। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि हमले उनकी अपेक्षा से कहीं अधिक व्यापक थे। एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अमेरिकी सेना इन हमलों की “विस्तृत प्रकृति” देखकर हैरान रह गई और इसे अच्छा कदम नहीं माना।
इज़राइल की सेना ने तेहरान और उसके आसपास तीन तेल डिपो और एक रिफाइनरी को निशाना बनाया। हमलों के बाद राजधानी में भयावह दृश्य देखने को मिले। कई जगहों पर आग तेजी से फैलती दिखी और काले धुएँ के घने बादल पूरे इलाके में छा गए। एक तेल डिपो से ईंधन बहकर सड़कों पर फैल गया और उसमें आग लगने से लोगों ने “आग की नदी” जैसी स्थिति बताई। हमले के बाद बारिश के पानी में तेल और कालिख मिलकर काला पानी गिरने की खबरें भी सामने आईं, जिसे लेकर लोगों को घरों में रहने की चेतावनी दी गई है।
इन हमलों का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ा है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 107.97 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो शुक्रवार के बंद भाव 92.69 डॉलर से करीब 16.5 प्रतिशत अधिक है। वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट की कीमत भी बढ़कर 106.22 डॉलर प्रति बैरल हो गई।
ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर तेल ढांचे पर हमले जारी रहे तो वह भी ऐसी ही कार्रवाई कर सकता है, जिससे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।