

इज़राइली-अमेरिकी एयरस्ट्राइक में एक गर्ल्स स्कूल की 51 छात्राओं की मौत हो गई। इन हमलों की खबर सबसे पहले राजधानी तेहरान से सामने आई और बाद में देश के अन्य हिस्सों से भी विस्फोटों की सूचना मिली। मिनाब में हुई ये मौतें इस सैन्य अभियान में दर्ज की गई पहली आधिकारिक पुष्टि वाली हताहत थीं।
मिनाब में ईरान के पैरामिलिट्री बल Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) का एक बेस भी मौजूद है। इस बीच, ईरान की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने नागरिकों को राजधानी तेहरान छोड़ने की सलाह दी। सुरक्षा एजेंसी ने बयान में कहा कि हालात को देखते हुए लोग शांति बनाए रखते हुए, जहां तक संभव हो, दूसरे शहरों में चले जाएं।
हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरानी नागरिकों से “अपनी किस्मत अपने हाथ में लेने” और 1979 से सत्ता में मौजूद इस्लामिक नेतृत्व के खिलाफ खड़े होने की अपील की।
शुरुआती हमलों में से कुछ Ali Khamenei के दफ्तर के आसपास के इलाकों को भी निशाना बनाए जाने की खबर है। ईरानी मीडिया के मुताबिक, देश के कई हिस्सों में हमले हुए और राजधानी से धुएं के गुबार उठते देखे गए।
इसके बाद मिडिल ईस्ट के कई देशों में जवाबी कार्रवाई की खबरें सामने आईं। बहरीन, कुवैत और कतर में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने की सूचना है। वहीं, UAE और इराक ने एहतियातन अपना एयरस्पेस बंद कर दिया।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने कड़ा बयान जारी करते हुए कहा कि देश अपने जवाब में “जरा भी हिचकेगा नहीं।” सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए बयान में मंत्रालय ने कहा, “अब वक्त आ गया है कि हम अपने देश की रक्षा करें और दुश्मन के सैन्य हमले का डटकर सामना करें।”
दूसरी तरफ, AFP की रिपोर्ट के मुताबिक मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों पर ईरानी हमलों के बीच रियाद, दोहा और अबू धाबी में नए धमाकों की आवाजें सुनी गईं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बहरीन के गृह मंत्रालय ने जुफेयर इलाके से लोगों को निकालना शुरू कर दिया है, जहां अमेरिकी नौसैनिक अड्डा स्थित है। मंत्रालय ने नागरिकों से संबंधित अधिकारियों के साथ सहयोग करने की अपील की है।