

जैसा ही 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के पहले हमलों ने ईरान को झकझोरा, गाजा पट्टी में चिंताएं आसमान छूने लगीं। दो साल से ज्यादा चले नरसंहार जैसे युद्ध में तड़प रही आबादी को अब क्षेत्रीय जंग ने और गला घोंट दिया। इजरायल ने सीमाओं पर रुख्माई बढ़ा दी, मानवीय सहायता के ट्रक रुक गए।
हमास के साथ अक्टूबर के “सीजफायर” का उल्लंघन जारी है, लेकिन ईरान पर फोकस ने गाजा को किनारे कर दिया। 20 लाख फलस्तीनियों के लिए भोजन, दवा और ईंधन की किल्लत हो गई। ह्यूमन राइट्स मॉनिटर के रामी अब्दू ने कहा, “ईरान युद्ध ने इजरायल को गाजा में अपराध तेज करने की छूट दी, सीमाएं बंद होने से हालात बदतर।” हमले के पहले दिन केरेम शालोम सीमा पूरी तरह बंद, मरीज विदेश नहीं जा सके।
कुछ दिन बाद सीमित खुली, लेकिन जरूरी 600 ट्रक रोजाना के मुकाबले नाममात्र पहुंचे। ईंधन-भारी मशीनें रुकीं, मलबा हटाना मुश्किल। अर्थशास्त्री मोहम्मद अबू जियाब ने चेताया, “कीमतें 200-300% उछलीं, बाजार सूने, संयुक्त राष्ट्र संगठन भी राहत नहीं बांट पा रहे।” यूनिसेफ प्रवक्ता ने भोजन-स्वच्छता सामान की महंगाई की पुष्टि की।
गाजा की जिंदगी अब दैनिक संकट में डूबी, जहां ईरान की चिंगारियां गाजा की चीखें दबा रही हैं।