

प्रसेनजीत, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : मुर्शिदाबाद के बहरमपुर विधानसभा क्षेत्र में इस बार चुनावी समीकरण का केंद्र महिला मतदाता बन गई हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और उम्मीदवार अधीर रंजन चौधरी की मजबूत स्थानीय छवि और महिलाओं के बीच उनकी 'स्वीकार्यता' उन्हें बढ़त दिला सकती है, लेकिन सवाल यह है कि क्या वे 2024 के लोकसभा चुनाव में मिले वोट शेयर को विधानसभा चुनाव में जीत में बदल पाएंगे?
बहरमपुर ने दिया था अधीर का साथ
2024 के लोकसभा चुनाव में भले ही अधीर चौधरी को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन बहरमपुर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस का प्रदर्शन अपेक्षाकृत मजबूत रहा। यहां पार्टी को 39.47% वोट मिले, जो भाजपा (36.19%) और तृणमूल कांग्रेस (22.24%) से अधिक थे। यह संकेत देता है कि स्थानीय स्तर पर अधीर की पकड़ अब भी कायम है।
महिलाएं बन सकती हैं निर्णायक फैक्टर
2026 विधानसभा चुनाव के लिए बहरमपुर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में कुल 2,44,703 पंजीकृत मतदाता हैं, जिनमें 1,20,759 पुरुष, 1,23,934 महिलाएं (जो पुरुषों से अधिक हैं) और 10 तृतीय लिंग के मतदाता शामिल हैं। लोकसभा चुनाव में अधीर को शिकस्त मिलने के बावजूद, आकलनों से संकेत मिलता है कि उन्हें महिला मतदाताओं का पर्याप्त समर्थन प्राप्त था। स्थानीय महिलाओं के बीच अधीर की “सख्त लेकिन संरक्षक” की छवि उन्हें भावनात्मक समर्थन दिलाती है। कई महिला मतदाताओं का मानना है कि उनके कार्यकाल में बहरमपुर में महिलाओं के लिए सुरक्षा का माहौल बेहतर था।
SIR के बाद का परिदृश्य
रिपोर्ट के अनुसार, पूरे राज्य में SIR में हटाये गये या लंबित मतदाताओं में 61.8 प्रतिशत महिलाएं हैं, जिनकी संख्या लगभग 61.93 लाख है। इसका असर खासकर सामाजिक रूप से हाशिये पर मौजूद वर्गों पर अधिक पड़ता दिख रहा है। मुर्शिदाबाद को सबसे अधिक प्रभावित जिला माना जा रहा है, जहां 11,01,145 सत्यापित मतदाताओं में से 4,55,137 को अयोग्य घोषित किया गया है और कुल 7,48,959 नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। बहरमपुर में 2026 चुनाव में कुल 2.44 लाख मतदाता हैं, जिनमें 1.23 लाख महिलाएं शामिल हैं। अंतिम रिकॉर्ड के अनुसार, बहरमपुर में 8,500 से अधिक नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं।
आत्मविश्वास बढ़ा, जीत की गारंटी नहीं
SIR प्रक्रिया के बाद बदले हालात चुनौती भी पेश कर रहे हैं। बड़ी संख्या में महिला मतदाताओं के नाम सूची से हटने या लंबित रहने की खबरें चुनावी गणित को प्रभावित कर सकती हैं, खासकर मुर्शिदाबाद जैसे जिले में। ऐसे में साफ है कि महिला समर्थन अधीर चौधरी के आत्मविश्वास को बढ़ाता जरूर है, लेकिन जीत की गारंटी नहीं देता। अगर वे इस समर्थन को व्यापक सामाजिक और राजनीतिक गठजोड़ में बदल पाते हैं, तभी लोकसभा की बढ़त को विधानसभा चुनाव में जीत में तब्दील करना संभव होगा।