

नई दिल्ली: तीन जुलाई से शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा को लेकर इस बार सुरक्षा व्यवस्था को अब तक का सबसे मजबूत बनाया जा रहा है। आतंकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए पहली बार बड़े पैमाने पर फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) कैमरों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिनमें वांटेड आतंकियों का डेटा भी अपलोड रहेगा।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यात्रा मार्ग की सुरक्षा के लिए एक लाख से ज्यादा सुरक्षा बलों और एनएसजी कमांडो की तैनाती का प्लान तैयार किया है। यह अब तक की सबसे बड़ी सुरक्षा तैनाती मानी जा रही है।
सुरक्षा के मद्देनजर एक जुलाई से यात्रा समाप्त होने तक पूरा अमरनाथ यात्रा मार्ग नो फ्लाई जोन रहेगा। इस दौरान यात्रा रूट पर किसी भी हेलिकॉप्टर उड़ान की अनुमति नहीं होगी।
यात्रा की सुरक्षा में करीब 670 कंपनियों के 70 हजार से ज्यादा जवान सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ और एसएसबी से तैनात किए जाएंगे। इनमें सबसे बड़ी संख्या सीआरपीएफ जवानों की होगी।
सुरक्षा एजेंसियों ने यात्रा मार्ग पर 500 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। इनमें पहली बार बड़ी संख्या में फेशियल रिकग्निशन कैमरे शामिल हैं।
इन कैमरों में जम्मू-कश्मीर में सक्रिय और वांटेड पाकिस्तानी आतंकियों की तस्वीरों और रिकॉर्ड को फीड किया गया है। अगर कोई संदिग्ध व्यक्ति यात्रा क्षेत्र में दिखाई देता है तो सिस्टम तुरंत कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज देगा।
अमरनाथ यात्रा के दोनों प्रमुख मार्गों पहलगाम और बालटाल पर तीन स्तर की सुरक्षा व्यवस्था होगी। इसमें बेस कैंप, ट्रांजिट कैंप, यात्री निवास और जम्मू-कश्मीर नेशनल हाईवे की सुरक्षा शामिल है।
यात्रा मार्ग के दोनों ओर करीब तीन किलोमीटर पहले से ही सुरक्षा घेरा तैयार किया जा रहा है। इस क्षेत्र में केवल सत्यापित लोगों को ही प्रवेश मिलेगा।
यात्रियों के साथ-साथ घोड़े-खच्चर संचालकों, पिट्ठू, टैक्सी ऑपरेटर और फोटोग्राफरों के लिए भी रियल टाइम वेरिफिकेशन सिस्टम तैयार किया गया है।
सभी सेवा प्रदाताओं को RFID और QR कोड आधारित कार्ड जारी किए जा रहे हैं, जिससे उनकी पहचान और लोकेशन की निगरानी की जा सकेगी।
सुरक्षा को मजबूत करने के लिए यात्रा रूट पर 28 वॉच टावर, ड्रोन सर्विलांस और एंटी ड्रोन सिस्टम लगाए गए हैं। एनएसजी कमांडो भी मॉक ड्रिल कर सुरक्षा तैयारियों का जायजा ले चुके हैं।
इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से 28 अगस्त तक चलेगी और रक्षा बंधन के दिन इसका समापन होगा।