गठबंधन पर हुमायूं कबीर ने रख दी कुछ ऐसी शर्त...

सीपीएम-आईएसएफ साथ आएं तो गठबंधन पक्का !
गठबंधन पर हुमायूं कबीर ने रख दी कुछ ऐसी शर्त...
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सबिता, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : तृणमूल से बहिष्कृत तथा जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर ने गठबंधन को लेकर ऐसी शर्त रख दी है जिससे वाम राजनीति में हलचल पैदा हो गयी है। उनका कहना है कि यदि सीपीएम वामफ्रंट से अलग हो जाती है, तो वह सीपीएम और आईएसएफ के साथ मिलकर चुनाव लड़ने को तैयार हैं। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने यह संदेश सीपीएम के राज्य सचिव मो. सलीम को भी भेज दिया है। अब राजनीतिक गलियारों में कई सवाल उठ रहे हैं क्या सीपीएम, वामफ्रंट से अलग रास्ता अपनाएगी? क्या आईएसएफ के साथ मौजूदा गठबंधन बना रहेगा? इन घटनाक्रमों से राज्य की विपक्षी राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना नजर आ रही है। चुनाव से पहले बाबरी मस्जिद के नाम पर वोट मांगने को लेकर विवादों में रहे हुमायूं कबीर के साथ बैठक करने के बाद मोहम्मद सलीम को तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा था। इस बैठक को पार्टी के एक वर्ग ने भी अच्छा नहीं माना। कई लोगों ने आरोप लगाया कि वाम दल अपने मूल सिद्धांतों से भटक गए हैं। पूरे घटनाक्रम ने उस समय वाम राजनीति के भीतर वैचारिक मतभेद और रणनीतिक असमंजस को उजागर कर दिया था।

7 मार्च तक जवाब का इंतजार : हुमायूं कबीर ने गठबंधन को लेकर सक्रिय हो गए हैं। उनके अनुसार मो. सलीम को संदेश भेजा है। दावा है कि 2026 की चुनावी लड़ाई में वह सीपीएम और आईएसएफ को अपने साथ चाहते हैं। हालांकि, वह वामफ्रंट के साथ गठबंधन के पक्ष में नहीं हैं। यानी वह सहयोगी दलों को छोड़कर सीपीएम से सीधे हाथ मिलाने की अपील कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि वह 7 मार्च तक मोहम्मद सलीम के जवाब का इंतजार करेंगे। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नए गठबंधन समीकरणों को लेकर फिर चर्चा तेज हो गई है।

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