हावड़ा नगर निगम में वार्डों के पुनर्गठन की तैयारी, बढ़ेगी संख्या

जनसंख्या और भौगोलिक स्थिति के आधार पर होगा परिसीमन,बड़े वार्डों को तोड़कर बनाए जाएंगे नए वार्ड
Howrah Municipal Corporation Ward Reorganization: Ward Count May Increase to 60
फाइल फोटो
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निधि, सन्मार्ग संवाददाता

हावड़ा: हावड़ा नगर निगम के वार्डों के पुनर्गठन की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। वार्डों की संख्या भी 50 से बढ़ाकर 60 की जा सकती हैं। राज्य के शहरी विकास राज्य मंत्री उमेश राय ने कहा कि पिछली सरकार की तरह किसी पार्टी कार्यालय में बैठकर नहीं, बल्कि चुनाव आयोग और जिला प्रशासन की निगरानी में वार्ड परिसीमन किया जाएगा। जनसंख्या और भौगोलिक स्थिति को आधार बनाकर बड़े वार्डों को विभाजित कर नए वार्ड बनाए जा सकते हैं। बताया जा रहा है कि लंबे समय से हावड़ा नगर निगम में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति के कारण प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। वर्तमान में कई वार्डों की जिम्मेदारी एक-एक अधिकारी संभाल रहे हैं। कहीं जल निकासी की समस्या है तो कहीं खराब सड़कों और नागरिक सुविधाओं की कमी से लोगों को परेशानी हो रही है।

45 से 50 नंबर वार्ड तक पुनर्गठन की संभावना

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार हावड़ा नगर निगम के संयुक्त क्षेत्रों और एडेड एरिया के 45 से 50 नंबर वार्ड के बड़े हिस्से को पुनर्गठन के दायरे में लाया जा सकता है। विशेष रूप से 47, 48, 49 और 50 नंबर वार्ड में आबादी और क्षेत्रफल अधिक होने के कारण इन्हें विभाजित कर नए वार्ड बनाने की संभावना जताई जा रही है। लोगों का कहना है कि वार्ड के छोटे होने से नागरिक सुविधाएं बेहतर तरीके से मिल सकेंगी। नाजिरगंज, श्यामलडांगा, शेखपाड़ा सहित कई इलाकों के निवासियों ने पुनर्गठन के बाद सड़क, पानी, रोशनी और निकासी जैसी समस्याओं का तेजी से समाधान होने की उम्मीद जताई है।

जल्द चुनाव कराने की तैयारी, नए बोर्ड गठन पर सरकार का जोर

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भी पहले ही हावड़ा नगर निगम का चुनाव जल्द से जल्द कराने की घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि दिसंबर तक नए बोर्ड के गठन का लक्ष्य रखा गया है। इस क्रम में हावड़ा के आसपास के कुछ क्षेत्रों में वार्ड पुनर्गठन की जरूरत को लेकर विधायकों और अधिकारियों के बीच बैठक भी हुई है। बताया जा रहा है कि नवंबर में चुनाव हो सकते हैं। नागरिकों का भी मानना है कि चुनाव के बाद जनप्रतिनिधियों के इलाके में सक्रिय होने से समस्याओं को सीधे उठाने का मौका मिलेगा। हालांकि अंतिम निर्णय चुनाव आयोग और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा।

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