राज्य के 61 जेलों में तैनात हैं कुल 27 डॉक्टर

बाकी हैं फार्मस्सस्टों के हवाले
राज्य के 61 जेलों में तैनात हैं कुल 27 डॉक्टर
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जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : जेलों की व्यवस्था में सुधार के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के बेंच ने सुओमोटो एक पीआईएल दायर की है। बुधवार को जस्टिस देवांशु बसाक और जस्टिस शब्बार रसीदी के डिविजन बेंच में इसकी सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से एक रिपोर्ट दाखिल की गई। डिविजन बेंच ने रिपोर्ट पर गौर करने के बाद कई तीखें सवालों के साथ ही राज्य की लेटलतीफी पर तीखी नाराजगी जतायी।

रिपोर्ट के मुताबिक राज्य की 61 जेलों में कुल 27 डॉक्टर है। जस्टिस बसाक ने सवाल किया कि क्या बंदियों के इलाज के लिए इतने डॉक्टर काफी हैं तो राज्य का जवाब था कि काफी संख्या में फार्मासिस्ट तैनात किए गए हैं। जस्टिस बसाक ने सवाल किया कि क्या फिर इसे ही राज्य का स्टैंड मान लिया जाए। जस्टिस बसाक का सवाल था कि राज्य की जेलों में कुल 23,866 कैदी बंद हैं जो कि क्षमता से काफी अधिक हैं। इसपर जस्टिस बसाक का सवाल था कि नये जेल बनाएंगे या कैदियों को जमानत पर रिहा कर दिया जाए। जेल में खाली पदों पर नियुक्ति के मामले में भी राज्य के जवाब से डिविजन बेंच संतुष्ट नहीं हो पाया। जेल हिरासत में मौत और मुआवजा दिए जाने के आंकड़े पर भी डिविजन बेंच ने सख्त नाराजगी जतायी। एडवोकेट तापस भंज ने बेंच को बताया कि 2024 में जेल हिरासत में 143 लोगों की मौत हुई थी जबकि कुल 24 के मामले में ही मुआवजा दिया गया। जस्टिस बसाक ने कहा कि जेल हिरासत में हुई हर मौत के लिए मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है। अगर अप्राकृतिक मौत है तो आपराधिक मामला दर्ज किए जाने का प्रावधान है। राज्य सरकार ने विस्तृत जवाब देने के लिए समय देने की अपील की तो जस्टिस बसाक ने अगली सुनवाई के लिए 22 अप्रैल की तारीख तय कर दी।

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