

जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : सारदा चिटफंड घोटाले के प्रमुख सुदीप्त सेन को हाई कोर्ट से जमानत मिल गई। जस्टिस राजर्षि भारद्वाज और जस्टिस उदय कुमार के डिविजन बेंच ने यह आदेश दिया। मामले की सुनवाई मंगलवार को हो गई थी पर डिविजन बेंच ने अपने फैसले को आरक्षित कर लिया था। सुदीप्त सेन को इस मामले में 2013 में गिरफ्तार किया गया था।
डिविजन बेंच ने जमानत के साथ कुछ शर्तें भी लगा दी है। सुदीप्त सेन को अपना पासपोर्ट जमा करना पड़ेगा अगर वह किसी अन्य मामले में किसी अन्य अदालत में जमा नहीं किया गया है। ट्रायल कोर्ट की लिखित अनुमति के बगैर राज्य के बाहर नहीं जा सकते हैं। बारासात थाने के ओसी को उन्हें अपने स्थायी पते की जानकारी देनी पड़ेगी। ओसी को पूर्व में सूचना दिए बगैर अपने आवास को बदल नहीं सकते हैं। उन्हें दस हजार रुपए का बांड भरना पड़ेगा। इसके साथ ही किसी वित्तीय संस्थान, कलेक्टिव इंवेस्टमेंट स्कीम (सीआईएस) और मल्टी लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) से नहीं जुडे़ंगे। इस मामले से जुड़े लोगों से संपर्क साधने की कोशिश नहीं करेंगे। इसके साथ ही गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगे। यहां गौरतलब है कि सारदा चिटफंड के दिवालिया होने के बाद सुदीप्त सेन अपनी सहायिका देवयानी मुखर्जी के साथ फरार हो गए थे। पुलिस ने उन्हें 2013 में कश्मीर से गिरफ्तार किया था। इसके बाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इसकी जांच पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंप दी गई थी। सुदीप्त सेन के साथ ही देवयानी के खिलाफ भी मामला दायर किया गया था। सुदीप्त सेन के खिलाफ सीबीआई और राज्य पुलिस की तरफ से कुल 267 मामले दायर किए गए थे। पश्चिम बंगाल के कमोबेश सभी जिलों में सुदीप्त सेन के खिलाफ मामले दायर किए गए थे। इनमें से बारासात थाने में दर्ज दो मामलों के अलावा सभी मामलों में जमानत मिल गई थी। इन दोनों मामलों में हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर आने की राह खुल गई। उनके एडवोकेट ने बताया कि सुदीप्त सेन को उनके खिलाफ सभी मामलों के तहत अधिकतम सात साल की सजा हो सकती है, जबकि उन्होंने 13 साल से अधिक समय जेल में गुजार दिया है।