

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद सरकारी पहचान में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। ‘Egiye Bangla’ पोर्टल से ‘बिस्वा बंगला’ लोगो हटाकर उसकी जगह अशोक स्तंभ को लगा दिया गया है। इसके साथ ही वेबसाइट का रंग भी नीला-सफेद से बदलकर भगवा कर दिया गया है।
‘बिस्वा बंगला’ ब्रांड की शुरुआत 16 सितंबर 2013 को तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने की थी। यह लोगो बंगाली अक्षर “B” का प्रतीक था और राज्य की पहचान के तौर पर सभी सरकारी वेबसाइटों और दस्तावेजों में इस्तेमाल होता था।
अब ‘Egiye Bangla’ पोर्टल पर सफेद बैकग्राउंड के साथ अशोक स्तंभ दिख रहा है, जिसके नीचे नए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की तस्वीर भी लगाई गई है। होमपेज पर ई-सेवाएं, उद्योग, पर्यटन और कृषि जैसे विभागों के आइकन भी भगवा रंग में नजर आ रहे हैं।
भाजपा का कहना है कि किसी व्यक्ति द्वारा बनाए गए लोगो का सरकारी कामकाज में इस्तेमाल उचित नहीं है और अशोक स्तंभ ही सरकार का सर्वोच्च प्रतीक है। वहीं ‘बिस्वा बंगला’ का उपयोग राज्य की कला, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा देने के लिए किया जाता रहा है।
इस लोगो को लेकर विवाद पहले भी उठ चुका है। 2017 में पूर्व भाजपा विधायक मुकुल रॉय ने आरोप लगाया था कि इस पर अभिषेक बनर्जी का अधिकार है। हालांकि अभिषेक बनर्जी ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कानूनी नोटिस भेजा था।
ममता बनर्जी ने विधानसभा में कहा था कि उन्होंने यह लोगो खुद बनाया और बिना किसी रॉयल्टी के राज्य सरकार को उपयोग की अनुमति दी थी। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि सरकार भविष्य में इसका इस्तेमाल नहीं करती, तो लोगो उनके पास वापस चला जाएगा।
करीब 13 वर्षों में ‘बिस्वा बंगला’ तृणमूल सरकार की पहचान बन चुका था। लेकिन नई सरकार के शपथ लेने के बाद इसे तुरंत हटा दिया गया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सरकारी कर्मचारी केवल सरकार के निर्देशों के अनुसार ही काम करते हैं।