फलता में हिंदू-मुस्लिम वोट समीकरण के बीच 21 मई को पुनर्मतदान, भारी सुरक्षा में होगा चुनाव

CRPF पहरे में फिर वोट देगा फलता फलता बना बंगाल चुनाव का सबसे बड़ा राजनीतिक टेस्ट केस

फलता में हिंदू-मुस्लिम वोट समीकरण के बीच 21 मई को पुनर्मतदान, भारी सुरक्षा में होगा चुनाव
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केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : दक्षिण 24 परगना जिले का Falta विधानसभा क्षेत्र पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की सबसे हाई-प्रोफाइल, संवेदनशील और राजनीतिक रूप से निर्णायक सीटों में शामिल हो चुका है। चुनाव आयोग द्वारा 21 मई को पूरे विधानसभा क्षेत्र में पुनर्मतदान (Repoll) कराने के आदेश के बाद फलता अब राज्य की राजनीति का केंद्र बन गया है। इस सीट पर कुल 2,36,667 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे, जिनमें लगभग 1.21 लाख पुरुष और 1.14 लाख महिला मतदाता शामिल हैं। राजनीतिक दलों की नजर खास तौर पर हिंदू और मुस्लिम वोटरों के रुझान पर टिकी हुई है, क्योंकि यही सामाजिक समीकरण इस चुनाव के अंतिम परिणाम को प्रभावित कर सकता है। जनसांख्यिकीय आकलनों के मुताबिक फलता में मुस्लिम मतदाता 38 से 42 प्रतिशत के बीच हैं, जबकि हिंदू मतदाताओं की हिस्सेदारी 57 से 61 प्रतिशत मानी जा रही है। यही वजह है कि यह सीट अब केवल एक सामान्य विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि बंगाल में “फ्री एंड फेयर पोल”, केंद्रीय सुरक्षा बलों की भूमिका, पंचायत नेटवर्क और धार्मिक-सामाजिक ध्रुवीकरण की सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा बन चुकी है।

हिंदू-बहुल क्षेत्रों में भाजपा ने की है पकड़ मजबूत

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार मुस्लिम बहुल इलाकों में पारंपरिक रूप से तृणमूल कांग्रेस की पकड़ मजबूत रही है। Hasimnagar, Gopalpur, Fatepur, Bhadura और Haridaspur जैसे क्षेत्रों के कई बूथों पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 55 से 75 प्रतिशत तक बताई जाती है। इन इलाकों में TMC को लाभ मिलता रहा है, हालांकि कुछ pockets में ISF और स्थानीय प्रभाव भी देखा जा रहा है। दूसरी ओर Falta Bazar, Kalatalahat, Bishra और Diamond Harbour रोड से जुड़े हिंदू-बहुल क्षेत्रों में भाजपा ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की है। इन इलाकों में OBC, मतुआ, नामशूद्र, महिष्य और सामान्य हिंदू वोटरों की बड़ी संख्या भाजपा के लिए अहम मानी जा रही है।

राजनीतिक दलों का पूरा फोकस

विश्लेषकों का मानना है कि इस सीट के मिश्रित और स्विंग बूथ सबसे निर्णायक साबित होंगे। ऐसे बूथों पर हिंदू और मुस्लिम वोट लगभग बराबर हैं तथा महिला और युवा मतदाता परिणाम प्रभावित कर सकते हैं। राजनीतिक दलों का पूरा फोकस अब इन्हीं इलाकों पर केंद्रित है। भाजपा का दावा है कि केंद्रीय बलों की मौजूदगी में “साइलेंट वोटर” खुलकर मतदान करेंगे, जबकि तृणमूल कांग्रेस को अपने मजबूत पंचायत नेटवर्क और महिला वोट बैंक पर भरोसा है।

धांधली के आरोपों के बाद हुआ था चुनाव रद्द

फलता सीट पर पुनर्मतदान कराने का फैसला चुनाव आयोग ने कथित EVM गड़बड़ी, गंभीर चुनावी उल्लंघनों, विपक्षी शिकायतों और कुछ बूथों पर कथित धांधली के आरोपों के बाद लिया। सूत्रों के मुताबिक पूरे विधानसभा क्षेत्र के लगभग 285 बूथों पर दोबारा मतदान कराया जाएगा। इसे बंगाल चुनाव में अब तक का सबसे बड़ा और असाधारण कदम माना जा रहा है।

हर बूथ पर वेबकास्टिंग निगरानी की व्यवस्था

इस बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चुनाव आयोग पूरी तरह सतर्क है। पूरे क्षेत्र में भारी संख्या में CRPF और CAPF जवानों की तैनाती की गई है। संवेदनशील बूथों पर अतिरिक्त केंद्रीय बल लगाए गए हैं। हर बूथ पर वेबकास्टिंग, माइक्रो ऑब्जर्वर और लाइव निगरानी की व्यवस्था की गई है। नदी किनारे, दूरदराज ग्रामीण और पिछली हिंसा से प्रभावित इलाकों को विशेष निगरानी श्रेणी में रखा गया है। फलता में SIR (Special Intensive Revision) को लेकर भी राजनीतिक विवाद बना हुआ है। राज्यभर में लाखों नाम हटाए जाने के बीच फलता सीट पर भी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नामों पर आपत्ति और समीक्षा हुई थी।

अब होगी सबसे बड़ी परीक्षा

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि फलता अब केवल एक विधानसभा सीट नहीं रह गई है, बल्कि यह पश्चिम बंगाल में “फ्री एंड फेयर पोल” की सबसे बड़ी परीक्षा बन चुकी है। यहां धर्म आधारित वोट समीकरण, पंचायत नेटवर्क, महिला मतदाता, केंद्रीय सुरक्षा बलों की भूमिका और मतदान प्रतिशत—ये सभी मिलकर चुनाव परिणाम तय करेंगे।

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