

मथुरा : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वृंदावन की पावन धरा को दिव्यता और भक्ति का जीवंत प्रतीक बताते हुए शुक्रवार को कहा कि यहां का प्रत्येक कण भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का साक्षी है।उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में वृंदावन धाम स्थित रामकृष्ण मिशन सेवा आश्रम चैरिटेबल अस्पताल के नवनिर्मित ऑन्कोलॉजी ब्लॉक का उद्घाटन करने के बाद मुर्मू ने अपने संबोधन में वृंदावन की पावन धरा को दिव्यता और भक्ति का जीवंत प्रतीक बताते हुए कहा कि यहां का प्रत्येक कण भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का साक्षी है।
उन्होंने मथुरा-वृंदावन की इस भूमि को सदियों से संतों और भक्तों को आध्यात्मिक चेतना प्रदान करने वाली तपोभूमि बताया। उन्होंने कहा कि जनकल्याण हेतु समर्पित एक उत्कृष्ट चिकित्सा केंद्र का इस पावन भूमि पर विकास अत्यंत पुण्य और प्रेरणादायक कार्य है। राष्ट्रपति ने रामकृष्ण मिशन को आध्यात्मिक चेतना और मानवीय सेवा के संगम का सशक्त प्रतीक बताते हुए कहा कि मिशन ने “नर सेवा ही नारायण सेवा” के संदेश को अपने कर्म और आचरण से साकार किया है।
मुर्मू ने कहा कि प्रेम, सेवा और करुणा ही ईश्वर तक पहुंचने का सर्वोत्तम मार्ग है। राष्ट्रपति ने रामकृष्ण मिशन सेवा आश्रम चैरिटेबल अस्पताल द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे संस्थान न केवल रोगों का उपचार करते हैं, बल्कि समाज में मानवता, करुणा और सेवा के मूल्यों को भी सुदृढ़ करते हैं।
उन्होंने कहा, "रामकृष्ण परमहंस की गहन भक्ति ने एक शक्तिशाली आध्यात्मिक धारा को जन्म दिया- एक ऐसी शक्ति जिसे उनके विश्व विख्यात शिष्य स्वामी विवेकानंद ने बाद में मानवता के कल्याण के लिए संस्थागत रूप दिया।"
मुर्मू ने कहा कि रामकृष्ण परमहंस के आदर्शों का अनुकरण करते हुए, इस संस्था के भिक्षु अपने कार्यों और आचरण के माध्यम से "मानवता की सेवा ही ईश्वर की सेवा है" के संदेश को मूर्त रूप दे रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह मिशन 118 वर्षों से लोगों की निष्ठापूर्वक सेवा कर रहा है। उन्होंने जनहित के कार्यों से यह सिद्ध किया है कि सच्ची नि:स्वार्थ सेवा और करुणा ही आध्यात्मिकता की वास्तविक अभिव्यक्ति है।''
राष्ट्रपति ने कहा कि यह महत्वपूर्ण बात है कि रामकृष्ण मिशन के इस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाओं के साथ-साथ कुशल और मानव सेवा के लिए प्रतिबद्ध चिकित्सकों की एक टीम भी है।