ईंधन संकट के बीच बंगाल बना 'मॉडल स्टेट'

इलेक्ट्रिक वाहनों ने लायी क्रांति, 2 साल में 154% का उछाल !
EV Revolution in West Bengal: 154% Growth in Electric Vehicles
सांकेतिक फोटो
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निधि, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक अस्थिरता के कारण दुनिया भर में ईंधन की आपूर्ति बाधित हुई है। पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की बढ़ती कीमतों ने भारत की परिवहन व्यवस्था पर भारी दबाव डाला है। इस संकट के बीच पश्चिम बंगाल ने एक मिसाल पेश की है। राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के इस्तेमाल में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो भविष्य के परिवहन के लिए एक बड़ा बदलाव संकेत है।

आंकड़ों में भारी उछाल: राष्ट्रीय औसत को पछाड़ा

परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में पश्चिम बंगाल में लगभग 52,000 इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत थे। मात्र दो वर्षों में, यानी 2025-26 तक, यह संख्या बढ़कर 1.33 लाख के पार पहुँच गई है। यह 154.7% की वृद्धि दर है, जो राष्ट्रीय औसत से भी अधिक मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सफलता राज्य सरकार की प्रोत्साहन नीतियों और लोगों में पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता का परिणाम है।

ई-रिक्शा (टोटों) की बड़ी भूमिका

बंगाल की इस ईवी क्रांति की रीढ़ 'टोटों' या ई-रिक्शा है। राज्य के कुल इलेक्ट्रिक वाहनों में 67% हिस्सेदारी अकेले ई-रिक्शा की है। इसके मुख्य कारण हैं:

  • कम परिचालन लागत और आसान उपलब्धता।

  • अक्टूबर 2025 से अनियंत्रित टोटो के पंजीकरण की सरकारी पहल।

  • शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी (Last Mile Connectivity)।

दोपहिया और चार पहिया वाहनों में भी बढ़त

सिर्फ टोटो ही नहीं, अन्य श्रेणियों में भी ईवी का क्रेज बढ़ा है। इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स में 15% और फोर-व्हीलर्स में लगभग 90% की वृद्धि देखी गई है। हालांकि, वर्तमान में 82% वाहन अब भी पेट्रोल पर निर्भर हैं, लेकिन यह आंकड़ा धीरे-धीरे घट रहा है।

बड़ी चुनौती: चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी

इस शानदार विकास के बावजूद एक बड़ी बाधा 'चार्जिंग स्टेशनों' की कमी है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से विकसित नहीं किया गया, तो लंबी दूरी की यात्रा करने वाले वाहन स्वामियों के लिए समस्या खड़ी हो सकती है। परिवहन विभाग के एक अधिकारी ने कहा, "युद्ध जैसी स्थिति में हमें ईंधन के लिए बाहरी देशों पर निर्भर नहीं रहना होगा, बस हमें अपने इंफ्रास्ट्रक्चर पर और निवेश करने की जरूरत है।"

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