छीने जा रहे हैं कर्मचारियों के मौलिक अधिकार : अभिषेक

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छीने जा रहे हैं कर्मचारियों के मौलिक अधिकार : अभिषेक
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प्रसेनजीत, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : शुभेंदु अधिकारी सरकार द्वारा जारी नयी आचार संहिता को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सरकारी कर्मचारियों के मीडिया में बोलने पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस निर्देशिका को “लोकतंत्र का गला घोंटने की कोशिश” बताया।

दरअसल, 19 मई को मुख्य सचिव कार्यालय की ओर से जारी सर्कुलर में आईएएस, डब्ल्यूबीसीएस, पुलिस अधिकारियों समेत सभी सरकारी और स्वायत्त संस्थाओं के कर्मचारियों के मीडिया में बयान देने, लेख लिखने और सरकारी नीतियों की आलोचना करने पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। इसके अगले दिन यह निर्देश सभी विभागों और जिला प्रशासन को लागू करने के लिए भेजा गया।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिषेक बनर्जी ने कहा कि “पूर्ण प्रतिबंध” (Complete Prohibition) शब्द का बार-बार इस्तेमाल कोई सामान्य अनुशासनात्मक नियम नहीं, बल्कि सरकारी कर्मचारियों को दी गई एक कड़ी चेतावनी है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में “दिल्ली के रिमोट कंट्रोल” से प्रशासन चल रहा है और कर्मचारियों पर जबरन चुप्पी थोपने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया से बात न करने, सरकारी नीतियों की आलोचना न करने और सार्वजनिक मंचों पर विचार व्यक्त करने से रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। अभिषेक ने दावा किया कि यह कदम कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों का हनन है और सरकार आलोचना से डर रही है।

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