बंगाल में चुनाव ,दिल्ली NCR के घरों में हाहाकार, घरेलू कामगारों का पड़ा अकाल

दिल्ली एनसीआर में ज्यादातर घरेलू काम करने वाले वोट डालने के लिए बंगाल गए हैं। ये अब अगले महीने ही लौट कर ही आयेंगें।
बंगाल में चुनाव ,दिल्ली NCR के घरों में हाहाकार, घरेलू कामगारों का पड़ा अकाल
Published on

सर्जना शर्मा

पश्चिम बंगाल में हो रहे विधानसभा चुनाव का असर दिल्ली एनसीआर में पड़ रहा है घरों में हाई राइज सोसायटियों में कामगारों की घोर कमी है। दिल्ली एनसीआर में घरों में काम करने वाली मेड , कार धोने वाले ,कूड़ा कचरा उठाने वाले कपड़े प्रेस करने वाले, माली , ड्राइवर सब पिछले एक महीने से गायब है। दिल्ली एनसीआर में ज्यादातर घरेलू काम करने वाले वोट डालने के लिए बंगाल गए हैं। ये अब अगले महीने ही लौट कर ही आयेंगें। पूरे एनसीआर में हाहाकार है घरों में महिलाएं परेशान हैं सोसायटियों में कचरे के ढेर लगे हैं। गुड़गांव के सेक्टर 56 की हुडा प्लॉट कॉलोनी की रंजना यादव बहुत परेशान है उनको अपने बंगले का झाड़ू पोछा बर्तन कपड़े सब करना पड़ रहा है।

रंजना यादव बताती हैं गुड़गांव में 95 फीसदी घरेलू कामगार पश्चिम बंगाल से हैं। उनकी कॉलोनी की ज्यादातर मेड और उनके पति को वोट डालने जाने के लिए एयर टिकट दिया गया है सब हवाई यात्रा करके गए हैं टिकट किसने दिया ये खुद तो नहीं बता रही हैं।रंजना यादव कहती हैं गुड़गांव में पश्चिम बंगाल की मुस्लिम मेड और अन्य कामगारों का बोलबाला है उनकी पूरी पूरी बस्तियां बसा दी गयी हैं। यूपी बिहार के श्रमिकों को उनके सेक्टर में तो कम से कम काम करने नहीं दिया जाता है। उनकी पूरी कालोनी में कचरे के ढेर लगे हैं रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने बाकायदा नोटिस जारी कर दिए गए हैं। कि ऊपर की मंजिलों पर रहने वालों का कूड़ा नहीं उठाया जाएगा।

दिल्ली के जनकपुरी में डॉ अशोक गांगुली की मेड ने उनको मार्च में ही बता दिया था कि वो एक महीने के लिए पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेने और वोट डालने जाएगी। अप्रैल के पहले सप्ताह में मेड ने उनको अपना एयर टिकट दिखाया और बोली अब हम जा रहे हैं हमारा हवाई जहाज का टिकट आ गया है। डॉ गांगुली कहते हैं अभी दिसंबर में ही उनकी मेड एक महीने के छुट्टी गयी थी और उन्होंने आने जाने का हवाई टिकट दिया था। अब फिर वापसी का एयर टिकट वो डॉ गांगुली से मांग रही है जिसके लिए उन्होंने मना कर दिया और कहा जिसने वोट डालने के लिए बुलाया है उसी से वापसी का टिकट भी लो।

नोएडा की हरिजन बस्ती में सब तो नहीं लेकिन लगभग 50 फीसदी मेड पश्चिम बंगाल की मुस्लिम हैं वैसे वे अपनी पहचान शांखा पाडा बिंदी सिंदूर से छुपाती हैं लेकिन जब उनको फोन करो तो उनके फोन पर उनके पति के नाम फ्लैश होते हैं तो पता चल जाता है कि वे किस समुदाय से हैं । हरिजन बस्ती में मालदा से आने वाले कामगारों के घरों पर चाले लगे हैं। लौट कर उनको काम तो किसी भी घर में फिर से मिल जाएगा लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार की जिन योजनाओं का लाभ उनको मिल रहा है वे कतई गंवाना नहीं चाहती हैं। उनको केवल वोट ही नहीं डालना है चुनाव प्रचार भी करना है। दिल्ली एनसीआर में कामकाजी महिलाओं के सामने संकट है घर संभाले बच्चे संभालें या फिर नौकरी करें। जिनके घर में बूढे माता पिता है उनके लिए तो और घना संकट है। गुड़गांव की हाई प्रोफाइल सोसायटी में रहने वाली स्वाति गुप्ता एक मल्टीनेशनल में काम करती हैं उनकी दो बंगाली मेड अप्रैल के पहले सप्ताह में मालदा चली गयी उनको भी एयर टिकट मिला था। स्वाति को इसलिए बहुत मुश्किल नहीं हो रही है कि ये दोनों पार्ट टाइम थीं और एक मेड घर में फुल टाईम है। लेकिन घर की साफ सफाई के लिए स्वाति ने एक बिहारी महिला को काम पर रखा है वो भी मुश्किल से मिली है।

दिल्ली में प्रवासी बंगालियों की बस्ती चितरंजन पार्क में भी बहुत मुश्किल हो रहा है ज्यादातर बंगाली मेड बंगाल जा चुकी हैं और कुछ जा रही हैं। जिनको मतदाता सूची में अपने नाम को लेकर मुश्किल थी वे जल्दी चली गई ताकि उनका नाम न कटने पाए। जिनका नाम मतदाता सूची में नाम है वे अब जा रही हैं। चितरंजन पार्क के कालीबाड़ी मंदिर ने घोषणा की है कि चितरंजन पार्क से बसें पश्चिम बंगाल जाएंगी जो मतदाताओं को लेकर जाएंगी। जिनका नाम मतदाता सूची में है वे इन बसों में वोट डालने जायेंगे 23 और 29 अप्रैल को वोट के हिसाब से मतदाता जा रहे हैं। बंगाली वोट बैंक पर हर पार्टी की नजर है सब उनके जाने की व्यवस्था कर रहे हैं। मतदाता के पौ बारह हैं लेकिन दिल्ली एनसीआर की महिलाओं को दिन में तारे दिख रहे हैं।

संबंधित समाचार

No stories found.

कोलकाता सिटी

No stories found.

खेल

No stories found.
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in