‘छात्रों की गूंज’ बनाम ‘झूठ की गूंज’

राहुल गांधी के इंदौर दौरे को लेकर सियासी पारा गर्म
 ‘छात्रों की गूंज’ बनाम ‘झूठ की गूंज’
पोस्टर वार
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राजनीतिक दांव-पेच और पैतरें जारी

इंदौर : इंदौर में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के शनिवार शाम को होने वाले ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से ठीक पहले शहर का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। आयोजन स्थल और शहर के विभिन्न हिस्सों में अचानक ‘झूठ की गूंज’ लिखे हुए पोस्टर लग गए हैं, जिसके बाद सत्ताधारी दल और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।

कांग्रेस का आरोप: भाजपा की सोची-समझी साजिश

इंदौर शहर कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने इन पोस्टरों के पीछे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का हाथ होने का सीधा आरोप लगाया है।

  • बाधाएं डालने का आरोप: कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी के इस कार्यक्रम को रोकने के लिए प्रशासन और सत्ताधारी दल के इशारे पर हरसंभव बाधाएं पैदा की गईं।

  • अवैध पोस्टरबाजी: कांग्रेस का यह भी कहना है कि जब तमाम अड़चनों को पार करके कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, तो शहर में अवैध रूप से ये पोस्टर लगवाए गए हैं।

  • पोस्टर हटाते दिखे नेता: विरोधस्वरूप बाद में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं को शहर के अलग-अलग चौराहों से इन पोस्टरों को हटाते हुए भी देखा गया।

भाजपा का पलटवार: छात्रों की स्वाभाविक प्रतिक्रिया

दूसरी ओर, भाजपा ने कांग्रेस के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे विद्यार्थियों का स्वतःस्फूर्त विरोध बताया है।

  • छात्रों पर दबाव का दावा: भाजपा के प्रदेश सह-मीडिया प्रभारी आलोक दुबे ने दावा किया कि शहर के युवाओं और स्टूडेंट्स पर इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अनुचित दबाव बनाया जा रहा था।

  • स्वाभाविक अभिव्यक्ति: दुबे का कहना है कि ‘झूठ की गूंज’ वाले पोस्टर किसी राजनीतिक दल ने नहीं, बल्कि विद्यार्थियों ने राहुल गांधी के कथित बयानों के विरोध में अपनी स्वाभाविक प्रतिक्रिया के रूप में लगाए हैं।

  • राजनीतिक संदेश: भाजपा के अनुसार, इन पोस्टरों का सीधा संदेश यह है कि युवा वर्ग राहुल गांधी के बयानों को 'झूठ' मानता है।

इस पूरे घटनाक्रम ने इंदौर की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट ला दी है, जहां एक तरफ कांग्रेस अपने कार्यक्रम को सफल बनाने में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ पोस्टरवार के जरिए सियासी जंग तेज हो गई है।

  1. कांग्रेस का आक्रामक और प्रशासनिक घेराबंदी का पैतरा

    कांग्रेस ने इस पूरे मामले में आक्रामक रुख अपनाते हुए सीधा हमला सत्ताधारी दल पर बोला है।

  2. पार्टी इकाई के अध्यक्ष चिंटू चौकसे के माध्यम से कांग्रेस ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि भाजपा राहुल गांधी के बढ़ते प्रभाव और युवाओं के बीच उनके इस 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम से घबराई हुई है। कांग्रेस का मुख्य पैतरा यह जताना था कि प्रशासन और सत्ता का दुरुपयोग कर कार्यक्रम में बाधाएं डाली गईं और जब वे इन बाधाओं को पार कर आयोजन करने में सफल हो रहे हैं, तो अवैध होर्डिंग और पोस्टरों के जरिए लोकतांत्रिक विरोध को कुचलने या भटकाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही, कार्यकर्ताओं को तुरंत मैदान में उतारकर उन पोस्टरों को हटवाना इस बात का संकेत था कि पार्टी ज़मीनी स्तर पर किसी भी नकारात्मक नैरेटिव को टिकने नहीं देना चाहती।

  3. भाजपा का बौद्धिक और डिजिटल काउंटर-नैरेटिव पैतरा: दूसरी ओर, भाजपा ने इन पोस्टरों पर सीधे तौर पर अपनी पार्टी का ठप्पा लगाने के बजाय इसे "विद्यार्थियों की स्वाभाविक अभिव्यक्ति" बताकर एक नया राजनीतिक दांव खेला।

  4. भाजपा के प्रदेश सह-मीडिया प्रभारी आलोक दुबे के बयानों से यह साफ झलकता है कि वे इस विरोध को स्वतःस्फूर्त और युवाओं का असंतोष साबित करना चाहते थे। इस पैतरे का मुख्य उद्देश्य यह दिखाना था कि युवा वर्ग राहुल गांधी के बयानों से वाकिफ है और उन्हें खारिज कर रहा है। इसके अलावा, पोस्टरों पर क्यूआर कोड (QR Code) का इस्तेमाल करके और उसके ज़रिए भाषणों के फैक्ट-चेक का दावा करना यह बताता है कि भाजपा केवल पारंपरिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि वह डिजिटल और डेटा-आधारित माध्यमों से विपक्ष के बयानों को घेरने की आधुनिक राजनीतिक तकनीक का उपयोग कर रही है।

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