

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के विवादित बयान से भारत और बांग्लादेश के बीच नया कूटनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। ढाका ने इन टिप्पणियों को “अपमानजनक” बताते हुए भारतीय उच्चायोग के कार्यवाहक अधिकारी को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया।
दरअसल, एक इंटरव्यू में हिमंता ने कहा था कि कथित बांग्लादेशी घुसपैठियों को आधिकारिक प्रक्रिया से वापस भेजना मुश्किल होता है। उन्होंने दावा किया कि कई बार लोगों को “रात के अंधेरे में” सीमा के पास ले जाकर “पुश बैक” किया जाता है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, आधिकारिक रास्ते जैसे विदेश मंत्रालय के जरिए प्रक्रिया लंबी होती है और इसमें बांग्लादेश की स्वीकृति जरूरी होती है। उन्होंने यह भी कहा कि कई घुसपैठिए वापस लौट आते हैं, खासकर पश्चिम बंगाल के रास्ते।
हिमंता ने यह भी दावा किया कि पिछले साल करीब 1400 लोगों को आधिकारिक रूप से वापस भेजा गया, जबकि असल संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। उन्होंने बताया कि कई मामलों में जिला प्रशासन के आदेश पर लोगों को सीमा तक ले जाकर बाहर किया जाता है।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों देशों के बीच रिश्ते सुधारने की कोशिशें चल रही हैं। ऐसे में इस बयान ने कूटनीतिक स्तर पर तनाव बढ़ा दिया है।