

निधि, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में निजी बस संचालकों ने धुलागढ़ टोल प्लाजा को लेकर बड़ा फैसला लिया है। वेस्ट बंगाल बस एंड मिनी बस ओनर्स एसोसिएशन ने टोल शुल्क में बढ़ोतरी और कैश लेन-देन बंद करने के फैसले के विरोध में 1 अप्रैल 2026 से टोल प्लाजा के उपयोग को सीमित या पूरी तरह बंद करने की घोषणा की है। एसोसिएशन के प्रमुख प्रदीप नारायण बोस ने कहा कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के नये नियमों से बस ऑपरेटरों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा, जिसे सहन करना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर पहले ही संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। बस मालिकों के इस फैसले के चलते कई रूटों की बसें अब धुलागढ़ टोल प्लाजा से बचते हुए वैकल्पिक मार्गों से चलेंगी। इससे यात्रियों को देरी और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
चुनाव ड्यूटी में लगे बस कर्मियों के लिए पोस्टल वोट की मांग
इसी बीच, एसोसिएशन ने चुनाव को लेकर भी एक महत्वपूर्ण मांग उठाई है। प्रदीप नारायण बोस ने कहा कि बस कर्मियों के लिए पोस्टल बैलेट की व्यवस्था की जानी चाहिए। उनका कहना है कि चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में बस कर्मचारी ड्यूटी में तैनात रहते हैं, जिसके कारण वे अपने मतदान केंद्र तक नहीं पहुंच पाते। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल में दो चरणों में होने वाले चुनाव के दौरान कई बस कर्मियों को अपने क्षेत्र से दूर काम करना पड़ता है। ऐसे में वे अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर पाते। बोस के अनुसार, लगभग 50 हजार बस कर्मी चुनाव के समय और मतदान के दिन भी ड्यूटी में रहेंगे, इसलिए उनके मताधिकार को सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग को इस दिशा में जरूरी कदम उठाना चाहिए। एसोसिएशन ने राज्य सरकार और संबंधित प्राधिकरणों से मांग की है कि टोल शुल्क बढ़ोतरी पर पुनर्विचार किया जाए और साथ ही बस कर्मियों के हितों को ध्यान में रखते हुए चुनाव प्रक्रिया में भी आवश्यक बदलाव किए जाएं।