परिसीमन प्रस्ताव ‘खतरनाक’, संविधान पर हमला: सोनिया गांधी

महिला आरक्षण पर विशेष सत्र को बताया राजनीतिक कदम; सरकार पर जल्दबाजी और विपक्ष को घेरने का आरोप
परिसीमन प्रस्ताव ‘खतरनाक’, संविधान पर हमला: सोनिया गांधी
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नई दिल्ली : Sonia Gandhi ने प्रस्तावित परिसीमन को “खतरनाक” और “संविधान पर हमला” करार देते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण मुद्दा नहीं है, बल्कि असली चिंता परिसीमन प्रक्रिया को लेकर है।

अंग्रेजी दैनिक The Hindu में लिखे लेख में सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि Narendra Modi सरकार द्वारा संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाना पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों में राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश है।

उन्होंने कहा, “इस तरह की असाधारण जल्दबाजी का एकमात्र उद्देश्य राजनीतिक फायदा उठाना और विपक्ष को रक्षात्मक स्थिति में लाना है।”

सोनिया गांधी ने याद दिलाया कि सितंबर 2023 में संसद ने सर्वसम्मति से नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया था, जिसके तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान है। हालांकि, यह अगली जनगणना और उसके आधार पर होने वाले परिसीमन के बाद ही लागू होगा।

उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार को अपने रुख में बदलाव करने में करीब 30 महीने क्यों लगे। साथ ही, सर्वदलीय बैठक बुलाने की विपक्ष की मांग ठुकराने पर भी आपत्ति जताई। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनावों के बीच संसद सत्र बुलाना “गुप्त रणनीति” का हिस्सा है, जो निर्णय लेने में प्रधानमंत्री के एकाधिकार को दर्शाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी परिसीमन से पहले जनगणना कराना जरूरी है और लोकसभा सीटों में वृद्धि का फैसला केवल गणितीय आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखकर होना चाहिए। सोनिया गांधी ने चेतावनी दी कि सीटों की संख्या में समानुपातिक वृद्धि से राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व का अंतर बढ़ सकता है, जिससे कुछ राज्यों का प्रभाव कम हो जाएगा।

उन्होंने यह भी मांग की कि महिला आरक्षण कानून में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की महिलाओं को भी शामिल किया जाए। अंत में उन्होंने कहा कि सरकार की मौजूदा प्रक्रिया “त्रुटिपूर्ण और अलोकतांत्रिक” है और इस पर व्यापक चर्चा की जरूरत है।

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