

सबिता, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : माकपा ने रविवार को बंगाल में न्यायिक अधिकारियों द्वारा सही पाए गए मतदाताओं की पूरक सूची प्रकाशित किये बिना ही चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करने के लिए निर्वाचन आयोग की आलोचना की। पार्टी ने उन लोगों के चुनाव लड़ने और मतदान के अधिकारों में कटौती किये जाने पर भी सवाल उठाए, जो वर्तमान में आयोग की जांच के दायरे में हैं। पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई के सचिव मोहम्मद सलीम ने आरोप लगाया कि भाजपा और तृणमूल की राजनीतिक आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए राज्य में लाखों मतदाताओं को मतदाता सूची में उनकी वैधता पर संदेह के आधार पर अवैध रूप से निलंबित रखा गया है। सलीम ने तर्क दिया, संविधान देश के नागरिकों को चुनाव लड़ने का अधिकार देता है। आयोग की संदिग्ध मतदाता सूची में अभी भी 60 लाख से अधिक लोग शामिल हैं, ऐसे में वे नामांकन पत्र दाखिल करने का अवसर खो देंगे, भले ही उनका नाम बाद में प्रकाशित होने वाली पूरक सूची में ही क्यों न आ जाए। नामांकन फॉर्म के लिए मतदाता सूची के भाग और क्रम संख्या के रूप में अपने मतदाता विवरण देना अनिवार्य है, जो वे नहीं कर पाएंगे।’ मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने रविवार को बंगाल में दो चरणों में विधानसभा चुनाव कराए जाने की घोषणा की। सलीम ने कहा, जब निर्वाचन आयोग त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार नहीं कर सकता, तो आप उससे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?
कांग्रेस नेता ने यह कहा : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रदीप भट्टाचार्य ने दो चरण में चुनाव कराने के फैसले का स्वागत किया, लेकिन साथ ही सवाल किया कि क्या मतदाता बिना डर और दबाव के अपने मताधिकार का प्रयोग कर पाएंगे।पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि उन्होंने हाल ही में आयोग की पूर्ण पीठ के साथ बातचीत में मतदाताओं को डराने और धमकाए जाने का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा,“मैं पश्चिम बंगाल में दो चरण में चुनाव कराने के निर्वाचन आयोग के फैसले का स्वागत करता हूं लेकिन मेरी एकमात्र चिंता यह है कि क्या मतदाता स्वतंत्र रूप से और बिना किसी भय के मतदान कर सकेंगे।” उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले चुनावों में कई बार ऐसा हुआ कि कई चरण में चुनाव होने के बावजूद भी मतदाता वोट नहीं डाल पाए।