CSR की 34 हजार करोड़ की बारिश, पूर्वोत्तर के राज्य उपेक्षित

मिजोरम में सिर्फ 4.48 करोड़ रुपये हुए खर्च जबकि अकेले महाराष्ट्र में 6,065.95 करोड़ रुपये का हुआ निवेश गुजरात 2,707.54 करोड़ पाकर दूसरे नंबर पर
CSR की 34 हजार करोड़ की बारिश, पूर्वोत्तर के राज्य उपेक्षित
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आइजोल : भारत में हर साल करीब 34,000 करोड़ रुपये के CSR (Corporate Social Responsibility) फंड उपलब्ध होते हैं, लेकिन पूर्वोत्तर के राज्यों को इसका अपेक्षाकृत छोटा हिस्सा ही मिल रहा है। मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने कहा कि राज्य की शांतिपूर्ण स्थिति, उच्च साक्षरता, सामाजिक सद्भाव और स्थिर प्रशासन इसे CSR परियोजनाओं के लिए अनुकूल बनाते हैं। उन्होंने कहा कि मिजोरम चाहता है कि CSR फंड वाली कंपनियां राज्य में उपलब्ध विकास के अवसरों को देखें और यहां परियोजनाओं के लिए साझेदारी करें।

आठ पूर्वोत्तर राज्यों को मिला सीमित हिस्सा

राष्ट्रीय CSR पोर्टल के FY 2023-24 के आंकड़ों के अनुसार, देश में कंपनियों ने कुल 34,908.75 करोड़ रुपये CSR पर खर्च किए। इसके मुकाबले पूर्वोत्तर के राज्यों में खर्च का आंकड़ा काफी कम रहा। असम में 488.62 करोड़ रुपये के साथ क्षेत्र में सबसे अधिक CSR खर्च दर्ज हुआ। इसके बाद मणिपुर में 83.19 करोड़, अरुणाचल प्रदेश में 39.57 करोड़, सिक्किम में 41.87 करोड़, मेघालय में 30.94 करोड़, नगालैंड में 15.41 करोड़, त्रिपुरा में 9.45 करोड़ और मिजोरम में सिर्फ 4.48 करोड़ रुपये खर्च हुए। महाराष्ट्र में अकेले 6,065.95 करोड़ रुपये का CSR खर्च हुआ, जो मिजोरम के खर्च से करीब 1,350 गुना अधिक है। गुजरात में 2,707.54 करोड़ और कर्नाटक में 2,254.88 करोड़ रुपये खर्च हुए। इससे CSR निवेश के भौगोलिक वितरण में बड़ा अंतर सामने आता है।

पांच साल में CSR खर्च लगातार बढ़ा

केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक कंपनियों का कुल CSR खर्च पिछले वर्षों में लगातार बढ़ा है। FY 2019-20 में यह 24,965.82 करोड़ रुपये था, जो FY 2020-21 में 26,210.95 करोड़, FY 2021-22 में 27,141.45 करोड़ और FY 2022-23 में 30,932.08 करोड़ रुपये पहुंचा। FY 2023-24 में यह बढ़कर 34,908.75 करोड़ रुपये हो गया। पांच वर्षों में कुल विकास CSR खर्च 1.44 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा।

शिक्षा और स्वास्थ्य CSR के प्रमुख क्षेत्र

देश में CSR का बड़ा हिस्सा शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च हो रहा है। FY 2023-24 में शिक्षा पर 12,134.57 करोड़ रुपये और स्वास्थ्य सेवाओं पर 7,150.87 करोड़ रुपये खर्च किए गए। पर्यावरणीय स्थिरता पर 2,429.97 करोड़, ग्रामीण विकास परियोजनाओं पर 2,408.09 करोड़ और आजीविका बढ़ाने वाली परियोजनाओं पर 2,360.09 करोड़ रुपये खर्च हुए। व्यावसायिक कौशल विकास के लिए 1,396.55 करोड़ रुपये का प्रावधान हुआ। इसके अलावा गरीबी, भूख और कुपोषण उन्मूलन, खेल प्रशिक्षण, महिला सशक्तीकरण, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, कला एवं संस्कृति, स्वच्छता और सुरक्षित पेयजल भी CSR के प्रमुख क्षेत्र रहे हैं।

मिजोरम ने 85 परियोजनाएं तैयार कीं

राज्य में CSR निवेश बढ़ाने के लिए मिजोरम सरकार ने पहला CSR कॉन्क्लेव आयोजित किया। मिजोरम CSR सेल और Confederation of Indian Industry (CII) के संयुक्त आयोजन में कॉरपोरेट क्षेत्र के प्रतिनिधियों को राज्य की विकास परियोजनाओं और निवेश की संभावनाओं से अवगत कराया गया। कॉन्क्लेव के दौरान राज्य सरकार के विभिन्न विभागों की ओर से चिन्हित 85 परियोजनाएं कंपनियों के सामने रखी जानी हैं। सरकार का उद्देश्य इन परियोजनाओं के लिए कॉरपोरेट फंडिंग हासिल करना और निजी क्षेत्र के साथ दीर्घकालिक विकास साझेदारी तैयार करना है।

CSR खर्च के लिए कानूनी व्यवस्था

कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 के तहत निर्धारित वित्तीय सीमा पूरी करने वाली कंपनियों के लिए CSR खर्च अनिवार्य है। ऐसी कंपनियों को पिछले तीन वित्त वर्षों के औसत शुद्ध लाभ का कम से कम 2 प्रतिशत CSR गतिविधियों पर खर्च करना होता है। CSR परियोजनाओं का चयन कंपनी बोर्ड और उसकी CSR व्यवस्था के तहत किया जाता है तथा गतिविधियां कानून की Schedule VII में निर्धारित क्षेत्रों के अनुरूप होनी चाहिए। मिजोरम की पहल इसी व्यवस्था के तहत पूर्वोत्तर में CSR निवेश की संभावनाओं को कंपनियों के सामने लाने की कोशिश है। राज्य सरकार की ओर से पेश की जा रही 85 परियोजनाओं के जरिए स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका, ग्रामीण विकास और अन्य सामाजिक जरूरतों के लिए कॉरपोरेट भागीदारी हासिल करने पर जोर दिया जा रहा है।

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