

ईरान-अमेरिका युद्ध को लेकर कांग्रेस के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं Mani Shankar Aiyar और Shashi Tharoor के बीच खुली चिट्ठियों के जरिए तीखी बहस छिड़ गई है।
अय्यर ने एक पत्र में थरूर के बयान की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि उनकी विदेश नीति पर राय “अनैतिक, अवसरवादी और सिद्धांतहीन” है। उन्होंने आरोप लगाया कि थरूर ने अमेरिका और पश्चिम के पक्ष में “ताकत ही सही है” जैसी सोच का समर्थन किया है। अय्यर ने ईरान पर हमले को Israel और United States द्वारा किया गया “गैरकानूनी और पापपूर्ण युद्ध” बताया।
अय्यर ने अपने पत्र में थरूर पर तीखा हमला करते हुए कहा कि वह अमेरिकी नीतियों के खिलाफ खुलकर बोलने से बच रहे हैं और व्यवहारिकता के नाम पर नैतिक मूल्यों से समझौता कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि थरूर प्रधानमंत्री Narendra Modi को खुश करने की कोशिश कर रहे हैं।
इन आरोपों पर जवाब देते हुए थरूर ने भी एक खुला पत्र जारी किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मामलों पर उनका दृष्टिकोण “राष्ट्रहित आधारित” है और भारत की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था तथा वैश्विक प्रतिष्ठा को ध्यान में रखकर ही राय दी जाती है।
थरूर ने स्पष्ट किया कि उन्होंने हाल ही में अपने लेख में ईरान युद्ध को “अवैध” बताया था और तुरंत युद्धविराम की मांग की थी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के साथ भारत के रणनीतिक संबंधों को खतरे में डालना समझदारी नहीं होगी।
उन्होंने Jawaharlal Nehru की गुटनिरपेक्ष नीति का जिक्र करते हुए कहा कि आज की बहुध्रुवीय दुनिया में भारत “मल्टी-अलाइनमेंट” की नीति अपना रहा है, जिसका उद्देश्य देश की संप्रभुता और हितों की रक्षा करना है।
थरूर ने विदेश यात्राओं को लेकर लगे आरोपों को भी खारिज करते हुए कहा कि उनकी अधिकतर यात्राएं निजी निमंत्रण पर होती हैं और उनका सरकार से कोई संबंध नहीं होता। उन्होंने अय्यर की टिप्पणी को “बेहद आपत्तिजनक और निराधार” बताया।
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान युद्ध पर यह विवाद कांग्रेस के भीतर विदेश नीति को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण को उजागर करता है।