

नयी दिल्ली : केंद्र सरकार ने शुक्रवार को जनगणना के दौरान लोगों की गिनती के चरण में पूछे जाने वाले 40 सवालों को अधिसूचित किया है, जिनमें जाति और कोविड टीकाकरण का स्थान जैसी बातें शामिल हैं। यह प्रक्रिया हिमपात वाले इलाकों में एक सितंबर से शुरू होगी।
भारत के महापंजीयक मृत्युंजय कुमार नारायण के आदेश में उन सवालों की जानकारी दी गई है, जैसे कि क्या व्यक्ति अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से है और उसकी जाति क्या है।
कब शुरू होगी जनगणना ?
इस महीने की शुरुआत में जारी एक राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड के हिमपात वाले इलाकों में लोगों की गिनती एक से 30 सितंबर के बीच होगी। आदेश में कहा गया है, ‘‘इस जनगणना को कराने के लिए, घर-घर जाकर लोगों की गिनती शुरू होने से ठीक पहले, 17 से 31 अगस्त तक खुद से जानकारी भरने (सेल्फ-एन्यूमरेशन) का विकल्प भी होगा।’’
देश के बाकी हिस्सों में लोगों की गिनती अगले साल शुरू होगी।
पहली बार ऐसा होगा कि जनगणना में जाति का ब्योरा भी लिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, प्रश्नावली में जातियों की कोई सूची होने की संभावना नहीं है और जवाब देने वालों से मिली जानकारी को ही दर्ज किया जाएगा। जाति के आधार पर गिनती करने का फैसला पिछले साल 30 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने लिया था।
भारत के महापंजीयक की एक अधिसूचना में कहा गया है, ‘‘जनगणना अधिनियम, 1948 (1948 का अधिनियम 37) की धारा 8 की उप-धारा (1) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, केंद्र सरकार निर्देश देती है कि जनगणना अधिकारी, अपने-अपने स्थानीय क्षेत्रों, जिनमें वे नियुक्त किए गए हैं, की सीमाओं के भीतर रहने वाले सभी लोगों से, नीचे बताई गई बातों के आधार पर, भारत की जनगणना 2027 के सिलसिले में घरों की अनुसूची (हाउसहोल्ड शेड्यूल) के जरिए जानकारी इकट्ठा करने के लिए सभी आवश्यक सवाल पूछ सकते हैं।’’
दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना पूरी तरह से डिजिटल होगी।
जवाब देने वालों से निजी जानकारी मांगी जाएगी, जैसे कि वैवाहिक स्थिति, शादी के समय उम्र, जीवनसाथी का नाम, राष्ट्रीयता, धर्म, अनुसूचित जाति (एससी)/अनुसूचित जनजाति (एसटी), जाति, माता-पिता की जानकारी, विकलांगता, मातृभाषा और अन्य ज्ञात भाषाएं, साक्षरता और डिजिटल साक्षरता की स्थिति आदि।
जवाब देने वालों से यह भी पूछा जाएगा कि क्या वे किसी शिक्षण संस्थान में जाते हैं, उनकी शिक्षा का उच्चतम स्तर क्या है, विषय क्या हैं, क्या उन्होंने पिछले साल कभी काम किया है, आर्थिक गतिविधि की श्रेणी, पेशा, उद्योग, व्यापार या सेवा का प्रकार, कामगार का वर्ग और क्या वे गैर-आर्थिक गतिविधि में लगे हैं (सीमांत, अर्ध-सीमांत और गैर-कामगारों के लिए)।
इसमें कहा गया है कि गणना करने वाले जवाब देने वालों से जन्मस्थान, पिछली बार रहने की जगह, पलायन का कारण, पिछली बार पलायन के बाद से इस गांव/कस्बे में रहने की अवधि और स्थायी आवासीय पता भी पूछेंगे।
इस समय शादीशुदा, विधवा, तलाकशुदा और अलग रह रही महिलाओं से उनके इस समय जीवित बच्चों की संख्या, मौजूदा शादी से बच्चों की संख्या और पिछले एक साल में जीवित पैदा हुए बच्चों की संख्या के बारे में पूछा जाएगा।
इसमें कहा गया है कि जवाब देने वालों से कोविड-19 टीकाकरण की जगह, बैंक खातों की कुल संख्या, मोबाइल नंबर, आधार नंबर, वोटर आईडी, पासपोर्ट नंबर और क्या उनके पास ड्राइविंग लाइसेंस है, इसके बारे में भी पूछा जाएगा।
जनगणना का पहला चरण 30 सितंबर तक चलेगा जिसमें घरों की सूची बनाई जाएगी और गिनती की जाएगी।
कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में घरों की सूची बनाने और उनकी गिनती के लिए गणना कर्मियों ने 16 अप्रैल से घर-घर जाना शुरू किया।
जनगणना कर्मी देश भर में सभी मकानों और भवनों में जाकर लोगों से 33 सवाल पूछते हैं। इन सवालों में घर की बुनियादी सुविधाओं, परिवार के मुखिया की जानकारी (जैसे नाम और लिंग) और घर के मालिकाना हक के बारे में पूछा जाता है।
हर दस साल में होने वाली जनगणना वैसे 2021 में होनी थी, लेकिन तब इसे कोविड-19 महामारी के कारण टाल दिया गया था।
केंद्रीय कैबिनेट ने जनगणना कराने के लिए 11,718 करोड़ रुपये को मंज़ूरी दी है।