देवदूत बनी बीएसएफ: एम्बुलेंस न मिलने पर तड़प रहा था रोगी, जवानों ने बचाई जान

BSF becomes angel: Patient was suffering due to lack of ambulance, soldiers saved his life
सांकेतिक फोटो
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निधि, सन्मार्ग संवाददाता

बशीरहाट : उत्तर 24 परगना के सीमावर्ती क्षेत्र हिंगलगंज में सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वे न केवल सीमा के रक्षक हैं, बल्कि संकट के समय आम जनता के लिए 'देवदूत' भी हैं। बुधवार को समय पर एम्बुलेंस न मिलने के कारण मौत से जूझ रहे एक युवक को बीएसएफ जवानों ने अपने कैंप की एम्बुलेंस से अस्पताल पहुँचाकर नई जिंदगी दी।

पारिवारिक विवाद में उठाया खौफनाक कदम

घटना हिंगलगंज के सीमावर्ती बांकड़ा डोबर इलाके की है। यहाँ के निवासी मृणाल मंडल ने पारिवारिक कलह के चलते कीटनाशक पीकर अपनी जीवन लीला समाप्त करने की कोशिश की। जहर के असर से मृणाल की हालत बिगड़ने लगी और परिजन उसे अस्पताल ले जाने के लिए बदहवास होकर एम्बुलेंस की तलाश करने लगे। इलाका बेहद दुर्गम होने के कारण घंटों की मशक्कत के बाद भी कोई वाहन उपलब्ध नहीं हो सका।

कमांडेंट की तत्परता आई काम

मृणाल के पिता गदाधर मंडल ने हार मानकर पास के बीएसएफ कैंप में गुहार लगाई। 77वीं वाहिनी के चार्ली कंपनी के कमांडर गौतम कुमार घोष ने बिना समय गंवाए कैंप की एम्बुलेंस तैयार करवाई और बीमार युवक को सैंडेलर बिल ग्रामीण अस्पताल पहुँचाया। डॉक्टरों का कहना है कि यदि मृणाल को लाने में थोड़ी भी देरी होती, तो उसे बचाना मुश्किल था।

परिजनों ने जताया आभार

मृणाल के पिता ने रुंधे गले से कहा, "अगर गौतम बाबू और उनके जवान मदद नहीं करते, तो मैं अपने बेटे को खो देता।" बीएसएफ कमांडर ने कहा कि मानवता की सेवा करना उनके कर्तव्य का हिस्सा है। इस घटना के बाद पूरे सीमावर्ती क्षेत्र में बीएसएफ की इस मानवीय पहल की सराहना हो रही है।

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