ईरान युद्ध पर ब्रिटेन का बड़ा फैसला: “यह हमारी लड़ाई नहीं”, PM कीर स्टार्मर ने किया किनारा

अमेरिका-इजराइल के दबाव के बावजूद युद्ध में शामिल होने से इनकार, होर्मुज जलडमरूमध्य पर 35 देशों की आपात बैठक बुलाएगा ब्रिटेन
ईरान युद्ध पर ब्रिटेन का बड़ा फैसला: “यह हमारी लड़ाई नहीं”, PM कीर स्टार्मर ने किया किनारा
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पूरा पश्चिम एशिया इस समय युद्ध की आग में झुलस रहा है, जहां अमेरिका और इजराइल के हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कई देशों को निशाना बनाया है। इस बढ़ते तनाव के बीच ब्रिटेन ने एक अहम और कड़ा रुख अपनाया है।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने साफ शब्दों में कहा है कि उनका देश ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल के सैन्य अभियान में शामिल नहीं होगा। उन्होंने दो टूक कहा, “यह हमारी लड़ाई नहीं है,” और स्पष्ट किया कि ब्रिटेन अपने राष्ट्रीय हितों के खिलाफ किसी भी आक्रामक युद्ध का हिस्सा नहीं बनेगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब नाटो सहयोगी देशों की ओर से ब्रिटेन पर युद्ध में शामिल होने का भारी दबाव बनाया जा रहा था। बावजूद इसके, स्टार्मर ने सेना को इस संघर्ष से दूर रखने का निर्णय लिया है।

हालांकि, ब्रिटेन पूरी तरह से पीछे भी नहीं हटा है। प्रधानमंत्री ने घोषणा की है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से सुरक्षित और चालू करने के लिए इस सप्ताह करीब 35 देशों की एक अहम ‘महाबैठक’ आयोजित की जाएगी। इस बैठक की अध्यक्षता ब्रिटेन की विदेश सचिव यवेट कूपर करेंगी। स्टार्मर ने कहा कि इस बैठक में कूटनीतिक और राजनीतिक उपायों पर चर्चा होगी, ताकि समुद्री मार्ग को फिर से सुरक्षित बनाया जा सके। इसका उद्देश्य वहां फंसे जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति बहाल करना है।

इसके साथ ही, बैठक के बाद सैन्य विशेषज्ञों को भी जोड़ा जाएगा, जो युद्ध के बाद इस अहम समुद्री मार्ग को स्थायी रूप से सुरक्षित रखने की रणनीति तैयार करेंगे। ब्रिटेन ने अमेरिका को साइप्रस स्थित अपने ‘आरएएफ अक्रोतिरी’ सैन्य अड्डे के सीमित उपयोग की अनुमति दी है, लेकिन सख्त शर्तों के साथ। यह स्पष्ट किया गया है कि इस ठिकाने का इस्तेमाल केवल रक्षात्मक उद्देश्यों, जैसे मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने के लिए ही किया जा सकेगा।

इस बीच, ब्रिटेन के इस फैसले से अमेरिका की नाराजगी भी सामने आई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि यह रुख दोनों देशों के पारंपरिक रिश्तों में दरार डाल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन का यह फैसला उसकी आर्थिक चिंताओं से भी जुड़ा है। अगर वह इस युद्ध में शामिल होता, तो स्वेज नहर और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर असर पड़ता, जिससे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता था। फिलहाल, ब्रिटेन ने साफ कर दिया है कि वह इस संकट का समाधान युद्ध नहीं, बल्कि कूटनीति के जरिए निकालने के पक्ष में है, और अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखेगा।

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