

केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : बांग्लादेशी घुसपैठ, सीमा सुरक्षा और फेंसिंग का मुद्दा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा के सबसे बड़े चुनावी हथियारों में शामिल रहा और इसका असर सीमावर्ती सीटों के परिणामों में साफ दिखाई दिया। भारत-बांग्लादेश सीमा से सटे 44 विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा ने न सिर्फ अपनी स्थिति मजबूत की, बल्कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को बड़ा झटका देते हुए 17 से बढ़कर 28 सीटों पर कब्जा कर लिया। सत्ता में आने के बाद भाजपा सरकार ने अपने चुनावी वादे के मुताबिक सीमा पर फेंसिंग के लिए जरूरी जमीन 45 दिनों के भीतर बीएसएफ को सौंपने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
“डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट” नीति को उठाया था जोर-शोर से
भाजपा ने चुनाव प्रचार के दौरान “डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट” नीति को जोर-शोर से उठाया था। पार्टी का आरोप था कि सीमावर्ती जिलों में अवैध घुसपैठ और फर्जी मतदाता पहचान बड़ा मुद्दा बन चुका है। भाजपा ने वादा किया था कि सरकार बनने के बाद सीमा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी और फेंसिंग के लिए लंबित जमीन जल्द बीएसएफ को उपलब्ध करायी जाएगी। माना जा रहा है कि इसी रणनीति का असर सीमावर्ती इलाकों में मतदान और चुनाव परिणामों पर दिखाई पड़ा। इन 44 सीमावर्ती सीटों में कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर, दार्जिलिंग, मालदह, मुर्शिदाबाद, नदिया, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना जिले शामिल हैं। इन क्षेत्रों में मुस्लिम आबादी का प्रभाव भी काफी माना जाता है।
एक झटके में बढ़ीं 11 सीटें
2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इन 44 सीटों में से 17 सीटें जीती थीं, जबकि टीएमसी 27 सीटों पर विजयी रही थी। इस बार तस्वीर पूरी तरह बदल गयी। भाजपा ने 28 सीटों पर जीत दर्ज की, यानी उसने टीएमसी से 11 अतिरिक्त सीटें छीन लीं। दूसरी ओर, टीएमसी घटकर 15 सीटों पर सिमट गयी। कांग्रेस को केवल एक सीट रानीनगर पर जीत मिली है।
जीत का अंतर भी बढ़ा
सीमावर्ती सीटों पर भाजपा की जीत का अंतर भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। 2021 में जहां भाजपा की औसत जीत का अंतर 15,795 वोट था, वहीं इस बार यह बढ़कर 40,195 वोट तक पहुंच गया यानी पार्टी ने न सिर्फ सीटों की संख्या बढ़ायी, बल्कि जीत का अंतर भी दोगुने से अधिक कर लिया। दूसरी ओर, टीएमसी की औसत जीत का अंतर घटकर 28,504 वोट रह गया। जिन सीटों को पार्टी जीतने में सफल रही, वहां भी उसका औसत जीत अंतर लगभग आधा हो गया। सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में हुई पहली कैबिनेट बैठक में भारत-बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग के लिए जरूरी जमीन 45 दिनों के भीतर बीएसएफ को सौंपने का फैसला लिया गया।
127 किलोमीटर सीमा क्षेत्र में फेंसिंग को सौंपी जानी है जमीन
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार करीब 127 किलोमीटर सीमा क्षेत्र में फेंसिंग के लिए जमीन बीएसएफ को सौंपी जानी है। अदालत ने पहले टिप्पणी की थी कि तय समय तक केवल 8 किलोमीटर हिस्से की जमीन ही हस्तांतरित की जा सकी थी। इसके अलावा 2025 की प्रक्रिया में कुल 356 एकड़ जमीन बीएसएफ को देने का प्रस्ताव सामने आया था, जिसमें विशेष रूप से मालदह, मुर्शिदाबाद, उत्तर 24 परगना और कूचबिहार जिलों के डीएम को निर्देश जारी किये गये थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीमावर्ती इलाकों में भाजपा की यह बढ़त आने वाले समय में बंगाल की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।