आरजी कर मामले में बड़ा 'विस्फोट', तीन-तीन आईपीएस अफसर सस्पेंड!

शुभेंदु अधिकारी सरकार का सनसनी फैसला
शुभेंदु अधिकारी
शुभेंदु अधिकारी
Published on

कोलकाता: मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल की नई भाजपा सरकार ने सत्ता संभालते ही बहुचर्चित आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल मामले को लेकर बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को नवान्न से घोषणा की कि 2024 में महिला चिकित्सक के कथित दुष्कर्म और हत्या मामले में पुलिस की भूमिका की दोबारा जांच होगी। इसके साथ ही तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों — विनीत गोयल, इंदिरा मुखोपाध्याय और अभिषेक गुप्ता — को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने का निर्णय लिया गया है।

विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने संदेशखाली और आरजी कर मामले को महिला सुरक्षा तथा कानून-व्यवस्था के प्रतीक मुद्दों के रूप में लगातार उठाया था। चुनाव प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने इन मामलों की “फाइल खोलने” की चेतावनी दी थी। अब सत्ता में आने के बाद सरकार उसी राजनीतिक एजेंडे को प्रशासनिक कार्रवाई में बदलती दिख रही है। राज्य के पुलिस प्रशासन के साथ बैठक के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा, राज्य के पुलिस मंत्री के रूप में मैं घोषणा कर रहा हूं कि उस समय जो हुआ, वह पूरी तरह से मिसहैंडलिंग थी।

एफआईआर दर्ज करने और प्रारंभिक कार्रवाई जैसे बुनियादी मामलों में गंभीर गड़बड़ी हुई। सबसे बड़े आरोप दो पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों से यह जानकारी मिली कि पीड़िता की मां को राज्य सरकार की ओर से पैसे देने की कोशिश की गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन अधिकारियों पर आरोप हैं, उन्हें जांच प्रक्रिया से अलग रखा जाएगा, ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके।

सरकार का कहना है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की जांच में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा, बल्कि राज्य सरकार केवल पुलिस प्रशासन की भूमिका की समीक्षा कर रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि मामले में कथित “घूस देने की कोशिश” की भी जांच होगी। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों के कॉल रिकॉर्ड, व्हाट्सऐप चैट और संपर्कों की पड़ताल की जाएगी। यहां तक कि उस समय के किसी मंत्री या तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से कोई निर्देश दिया गया था या नहीं, इसकी भी जांच की जाएगी।

शुभेंदु ने उस समय एक डीसी द्वारा की गई मीडिया ब्रीफिंग पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वह अधिकारी आधिकारिक प्रवक्ता नहीं थे, फिर भी सार्वजनिक बयान दे रहे थे। सरकार अब यह पता लगाएगी कि उन्हें किसके निर्देश पर मीडिया के सामने लाया गया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में बड़ा टकराव पैदा कर सकता है, क्योंकि जांच की आंच पूर्व सरकार और शीर्ष प्रशासनिक तंत्र तक पहुंचने के संकेत मिल रहे हैं।

logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in