'वोट नहीं दिया तो कट जाएगा नाम', डर और जिम्मेदारी के बीच प्रवासी श्रमिकों की घर वापसी

हावड़ा, सियालदह सहित कई मुख्य स्टेशनों पर जुट रही भीड़
Bengal Election 2026: Massive Rush at Howrah & Sealdah; Migrant Workers Return Over Voter List Fears.
फाइल फोटो REP
Published on

निधि, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान से ठीक पहले महानगर कोलकाता के रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर प्रवासी श्रमिकों का सैलाब उमड़ पड़ा है। हावड़ा, सियालदह और कोलकाता स्टेशन पर हर तरफ घर वापसी करने वाले लोगों की भारी भीड़ देखी जा रही है। केरल, महाराष्ट्र, दिल्ली और गुजरात जैसे राज्यों में काम करने वाले लाखों श्रमिक अपनी दिहाड़ी और आर्थिक नुकसान सहकर भी वोट डालने अपने गांवों की ओर दौड़ रहे हैं।

सियालदह और हावड़ा में पैर रखने की जगह नहीं

बुधवार सुबह से ही सियालदह और हावड़ा स्टेशन पर आने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों से उतरने वाले यात्रियों में सबसे बड़ी संख्या प्रवासी श्रमिकों की है। उत्तर बंगाल के कोचबिहार, जलपाईगुड़ी और मालदह जाने वाली ट्रेनों में 'थिक्टिके' (खचाखच) भीड़ है। दक्षिण भारत से लौटे श्रमिकों का कहना है कि वे इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहते। उनके मन में यह डर बैठ गया है कि 'एसआईआर' (SIR) और कड़े नियमों के बीच यदि उन्होंने मतदान नहीं किया, तो कहीं मतदाता सूची से उनका नाम न कट जाए।

बंगाल के 40 लाख प्रवासियों का गणित

एक अनुमान के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के लगभग 40 से 45 लाख लोग आजीविका की तलाश में दूसरे राज्यों में रहते हैं। इनमें से सबसे अधिक श्रमिक मालदह, मुर्शिदाबाद, उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर और कोचबिहार जिलों से हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों और स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बार घर लौटने वाले श्रमिकों की संख्या पिछले चुनावों के मुकाबले 20-25% अधिक देखी जा रही है।

"काम छूटे तो छूटे, अधिकार न छिने"

केरल में राजमिस्त्री का काम करने वाले दीपंकर राय ने हावड़ा स्टेशन पर बताया, "हमारे इलाके के लगभग 400 लोग एक साथ लौटे हैं। डर इस बात का है कि अगर वोट नहीं दिया तो भविष्य में सरकारी योजनाओं या नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों में कोई समस्या न आ जाए।" वहीं, जमालदह के पलटू सरकार ने कहा कि आर्थिक तंगी के बावजूद वे केवल इसलिए आए हैं ताकि उनका नाम वोटर लिस्ट में सुरक्षित रहे।

प्रशासन ने बढ़ती भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं, लेकिन घर पहुँचने की बेताबी और 'नाम कटने' के डर ने इस चुनावी मौसम को एक अलग ही मनोवैज्ञानिक मोड़ दे दिया है।

संबंधित समाचार

No stories found.

कोलकाता सिटी

No stories found.

खेल

No stories found.
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in