

केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में प्रथम चरण की वोटिंग से पहले चुनाव आयोग ने अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए हैं। वोटिंग से 72 घंटे पहले ही सीमाओं को सील करने और ड्रोन से निगरानी शुरू करने का फैसला लिया गया है, जिससे किसी भी तरह की घुसपैठ और गड़बड़ी को रोका जा सके।
बॉर्डर पर कड़ी चौकसी
चुनाव आयोग ने इस बार आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए बॉर्डर इलाकों में ड्रोन से निगरानी शुरू करने का निर्णय लिया है। इसका मकसद सीमावर्ती क्षेत्रों में हर गतिविधि पर नजर रखना और किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत पकड़ना है। सूत्रों के मुताबिक, बॉर्डर पार से अवैध घुसपैठ और आवाजाही रोकने के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों को साफ निर्देश दिया गया है कि कोई भी व्यक्ति बिना जांच के सीमा पार न कर सके।
72 घंटे पहले ही पाबंदियां लागू
आमतौर पर चुनाव से 48 घंटे पहले सीमाओं पर पाबंदियां लगाई जाती हैं, लेकिन इस बार हालात की गंभीरता को देखते हुए यह समयसीमा बढ़ाकर 72 घंटे कर दी गई है। इस फैसले को चुनाव आयोग की सख्ती और संवेदनशीलता के तौर पर देखा जा रहा है, खासकर उन इलाकों में जहां पहले चुनाव के दौरान गड़बड़ी की आशंका रही है।
गैर-जमानती वारंट वालों पर कार्रवाई के निर्देश
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि जिन लोगों के खिलाफ नॉन-बेलेबल अरेस्ट वारंट हैं, उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाए। इसके अलावा, संभावित उपद्रवियों की पहचान कर उन्हें पहले ही हिरासत में लेने का आदेश भी दिया गया है, ताकि मतदान के दौरान किसी भी तरह की अशांति न हो।
राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज
चुनाव आयोग के इस सख्त रुख को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। कई जानकारों का मानना है कि अगर ये कदम प्रभावी ढंग से लागू होते हैं, तो राज्य के चुनावी इतिहास में एक नई मिसाल कायम हो सकती है। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आयोग इन सख्त निर्देशों को जमीनी स्तर पर पूरी तरह लागू कर पाएगा या नहीं।