7 साल बाद भी 19.07 लाख NRC से बाहर लोगों को पर्ची नहीं

अस्वीकृति पर्ची का महत्व इसलिए है क्योंकि इसमें किसी व्यक्ति के एनआरसी में शामिल नहीं किए जाने से संबंधित जानकारी दी जानी है इसके आधार पर बाहर किए गए लोग संबंधित फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के समक्ष अपनी स्थिति को चुनौती दे सकते हैं
7 साल बाद भी 19.07 लाख NRC से बाहर लोगों को पर्ची नहीं
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नई दिल्ली-असम : असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) की अंतिम सूची जारी होने के करीब सात साल बाद भी इससे बाहर किए गए 19.07 लाख लोगों को अस्वीकृति पर्चियां जारी करने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि अंतिम एनआरसी को अभी तक औपचारिक रूप से अधिसूचित नहीं किया गया है। भारत के महापंजीयक (आरजीआई) की ओर से उच्चतम न्यायालय में दाखिल हलफनामे के मुताबिक, राज्य एनआरसी समन्वयक फिलहाल एनआरसी के आंकड़ों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक ‘सुरक्षा व्यवस्था’ तैयार करने की प्रक्रिया में है। एनआरसी का डेटा अभी तक आरजीआई को सौंपा नहीं गया है। आरजीआई ने कहा है कि डेटा प्राप्त होने के बाद ही अंतिम एनआरसी को औपचारिक रूप से अधिसूचित किया जा सकता है। 31 अगस्त 2019 को प्रकाशित अंतिम एनआरसी में 3.11 करोड़ आवेदकों के नाम शामिल किए गए थे, जबकि 19.07 लाख आवेदक सूची से बाहर रह गए थे। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अंतिम सूची में शामिल और बाहर किए गए लोगों से जुड़ी प्रक्रिया अभी भी पूरी तरह अंतिम रूप नहीं ले सकी है। अस्वीकृति पर्ची का महत्व इसलिए है क्योंकि इसमें किसी व्यक्ति के एनआरसी में शामिल नहीं किए जाने से संबंधित जानकारी दी जानी है। इसके आधार पर बाहर किए गए लोग संबंधित फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के समक्ष अपनी स्थिति को चुनौती दे सकते हैं। उच्चतम न्यायालय ने पहले राज्य एनआरसी समन्वयक को ऐसी पर्चियां जारी करने के लिए व्यवस्था तैयार करने का निर्देश दिया था।

2020 में आरजीआई को दी गई थी जानकारी

राज्य एनआरसी समन्वयक ने अक्टूबर 2020 में आरजीआई को बताया था कि अस्वीकृति पर्चियां तभी जारी की जा सकती हैं, जब आरजीआई अंतिम एनआरसी को औपचारिक रूप से अधिसूचित कर दे। अब आरजीआई के ताजा हलफनामे से स्पष्ट हुआ है कि डेटा हस्तांतरण और अधिसूचना की प्रक्रिया अभी लंबित है तथा अस्वीकृति पर्चियां जारी करने का काम शुरू नहीं हुआ है। एनआरसी के आंकड़ों की सुरक्षा का मुद्दा भी इस देरी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। आरजीआई के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था पूरी होने के बाद ही डेटा उसे सौंपा जा सकेगा और इसके बाद अंतिम एनआरसी की औपचारिक अधिसूचना की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा।

6 नवंबर को अगली सुनवाई

मामले की सुनवाई के दौरान असम सरकार ने अपना जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने सुनवाई 6 नवंबर तक टाल दी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ कर रही है। यह मामला असम स्टेट जमीयत उलेमा, ऑल असम माइनॉरिटी स्टूडेंट्स यूनियन, जमीयत उलेमा-ए-हिंद और अन्य की याचिकाओं से जुड़ा है। याचिकाओं में एनआरसी से बाहर किए गए लोगों को अस्वीकृति पर्चियां जारी करने और अंतिम सूची में शामिल लोगों को एनआरसी कार्ड उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इस तरह, 2019 में अंतिम सूची प्रकाशित होने के बावजूद एनआरसी प्रक्रिया के दो महत्वपूर्ण चरण—अंतिम सूची की औपचारिक अधिसूचना और बाहर किए गए आवेदकों को अस्वीकृति पर्चियां जारी करना—अब भी लंबित हैं।

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