असम में दो करोड़ की हेरोइन जब्त, तीन हजार करोड़ से अधिक के मादक पदार्थों पर कार्रवाई

जुलाई में 472.51 करोड़ रुपये के जब्त मादक पदार्थों को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू म्यांमार से मिजोरम-मणिपुर के रास्ते पहुंचती हैं नशीले पदार्थों की खेप तस्करी रोकने के लिए एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स बनाने की तैयारी
असम में दो करोड़ की हेरोइन जब्त, तीन हजार करोड़ से अधिक के मादक पदार्थों पर कार्रवाई
Published on: 

गुवाहाटी : असम में मादक पदार्थों की तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई लगातार जारी है। इसके बावजूद राज्य में हेरोइन, मेथामफेटामाइन और अन्य प्रतिबंधित पदार्थों की खेप पहुंचने का सिलसिला थम नहीं रहा है। सोमवार को गुवाहाटी के सेउज नगर इलाके में पुलिस ने एक संदिग्ध मादक पदार्थ तस्कर को गिरफ्तार कर उसके पास से करीब दो करोड़ रुपये मूल्य की 262 ग्राम संदिग्ध हेरोइन बरामद की। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि पुलिस ने आरोपी को उसके गंतव्य तक पहुंचने से पहले ही रोक लिया। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब राज्य सरकार मादक पदार्थों के कारोबार के खिलाफ अभियान तेज करने और अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क को तोड़ने पर जोर दे रही है। हालांकि, ताजा मामले में हेरोइन की आपूर्ति कहां से हुई और इसे किस स्थान पर पहुंचाया जाना था, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

तीन महीने में करोड़ों के मादक पदार्थों की बरामदगी

पिछले कुछ महीनों में असम में मादक पदार्थों की कई बड़ी खेप पकड़ी गई हैं। 12 जुलाई को राज्य सरकार ने जब्त मादक पदार्थों की करीब 472.51 करोड़ रुपये मूल्य की खेप को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू की। इसमें हेरोइन, गांजा, मेथामफेटामाइन की गोलियां, अफीम और प्रतिबंधित कफ सिरप सहित विभिन्न पदार्थ शामिल थे। यह आंकड़ा पहले जब्त किए गए पदार्थों के निस्तारण से संबंधित है, न कि केवल जुलाई में हुई बरामदगी से। 13 अगस्त को गुवाहाटी के अंतरराज्यीय बस टर्मिनल के पास पुलिस ने एक ट्रक से करीब 39.4 करोड़ रुपये मूल्य की हेरोइन और 1.40 लाख याबा टैबलेट बरामद कीं। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया। वहीं, 27 अगस्त को कोकराझार जिले के दम्रापारा में एक कंटेनर वाहन से करीब 10.5 करोड़ रुपये मूल्य की 1.48 किलोग्राम हेरोइन बरामद की गई और दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। 29 अगस्त को गुवाहाटी के बेहरबाड़ी इलाके में विशेष कार्यबल (एसटीएफ) ने 379 ग्राम हेरोइन के साथ तीन संदिग्ध तस्करों को पकड़ा। बरामद पदार्थ की कीमत तीन करोड़ रुपये से अधिक बताई गई। केंद्रीय राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने भी अगस्त में असम और मिजोरम में दो अलग-अलग अभियानों के दौरान 76 किलोग्राम मेथामफेटामाइन की गोलियां जब्त कीं और दो लोगों को गिरफ्तार किया। इन मामलों से संकेत मिलता है कि तस्कर विभिन्न वाहनों और परिवहन मार्गों का इस्तेमाल कर प्रतिबंधित पदार्थों को एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

म्यांमार से पूर्वोत्तर के रास्ते पहुंच रहे मादक पदार्थ

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 30 अगस्त को कहा था कि वर्ष 2021 से अब तक असम में 3,253 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं और 26,500 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को लगातार जारी रहने वाली कार्रवाई बताया था। मुख्यमंत्री के अनुसार, बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ म्यांमार से आते हैं और मिजोरम तथा मणिपुर के विभिन्न रास्तों से असम पहुंचते हैं। इसके बाद इन्हें देश के अन्य हिस्सों में भेजा जाता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी पूर्वोत्तर क्षेत्र में मादक पदार्थों की तस्करी को गंभीर चुनौती बताया है। मंत्रालय के अनुसार, म्यांमार के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा और संवेदनशील सीमा क्षेत्रों का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क करते हैं। तस्कर वैध व्यापार और यात्री परिवहन की आड़ में भी प्रतिबंधित पदार्थों को छिपाकर ले जाने की कोशिश करते हैं। ऐसे नेटवर्क पर कार्रवाई के लिए सीमावर्ती इलाकों में निगरानी और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय अहम है।

राज्य सरकार बनाएगी विशेष मादक पदार्थ रोधी बल

असम सरकार ने मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए पुलिस की खुफिया कार्रवाई और अंतरराज्यीय समन्वय को मजबूत करने की योजना बनाई है। तीन सितंबर को पुलिस अधीक्षकों के सम्मेलन के बाद मुख्यमंत्री ने कहा था कि असम पुलिस के भीतर एक समर्पित एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) गठित की जाएगी। उन्होंने बताया था कि केंद्र सरकार ने भी राज्य को ऐसी इकाई स्थापित करने का निर्देश दिया है। प्रस्तावित विशेष बल का उद्देश्य मादक पदार्थों की आपूर्ति के रास्तों की पहचान करना, तस्करी नेटवर्क के खिलाफ खुफिया सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई करना और पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाना है। सरकार ने मणिपुर, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश के साथ सहयोग मजबूत करने की बात भी कही है। केंद्र की ओर से डीआरआई, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) और असम राइफल्स जैसी एजेंसियां भी तस्करी के खिलाफ अभियान में शामिल हैं। अगस्त में डीआरआई ने मिजोरम में म्यांमार से चाम्फाई-जोकावथर मार्ग के जरिए लाई गई मेथामफेटामाइन की खेप पकड़ी थी, जिसे आगे असम पहुंचाया जाना था। इस मामले में एंबुलेंस का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई थी।

स्थानीय नेटवर्क पर कार्रवाई भी जरूरी

लगातार हो रही बरामदगियों के बावजूद तस्करी के मामलों का सामने आना बताता है कि चुनौती केवल सीमावर्ती इलाकों तक सीमित नहीं है। प्रतिबंधित पदार्थों को राज्य के भीतर पहुंचाने, छिपाने और आगे वितरित करने वाले नेटवर्क की पहचान करना भी जरूरी है। इसके लिए पुलिस को परिवहन मार्गों की निगरानी, संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की जांच, तस्करी से जुड़े स्थानीय संपर्कों की पहचान और पड़ोसी राज्यों के साथ सूचनाओं के आदान-प्रदान पर जोर देना होगा। गुवाहाटी के सेउज नगर में हुई ताजा बरामदगी इसी व्यापक चुनौती की ओर ध्यान खींचती है। अब जांच का अहम पहलू यह होगा कि 262 ग्राम संदिग्ध हेरोइन की आपूर्ति कहां से हुई, इसके पीछे कौन-सा नेटवर्क सक्रिय था और क्या गिरफ्तार व्यक्ति का संबंध किसी बड़े अंतरराज्यीय तस्करी गिरोह से है। इन सवालों के जवाब से ही तस्करी के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।

सन्मार्ग को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in