

राजस्थान उच्च न्यायालय ने नाबालिग से यौन उत्पीड़न के मामले में स्वयंभू धर्मगुरु Asaram की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा के खिलाफ दायर अपील पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।
जोधपुर में न्यायमूर्ति अरुण मोंगा और न्यायमूर्ति योगेंद्र कुमार पुरोहित की पीठ ने दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें सुनने के बाद सुनवाई पूरी कर ली।
गौरतलब है कि जोधपुर की एक विशेष अदालत ने अप्रैल 2018 में इस मामले में आसाराम को उसके शेष प्राकृतिक जीवनकाल के लिए कारावास की सजा सुनाई थी। यह मामला 2013 का है, जब जोधपुर के पास मनई गांव स्थित उसके आश्रम में एक नाबालिग के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप लगा था।
उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद इस अपील पर समयबद्ध सुनवाई की गई। कोर्ट ने 16 फरवरी से रोजाना सुनवाई तय की थी, ताकि मामले का जल्द निपटारा हो सके।
मामले में सह-आरोपी शिवा और शिल्पी को 20 साल की सजा सुनाई गई थी, जबकि शरद और प्रकाश को बरी कर दिया गया था। कुछ अन्य आरोपियों की सजा फिलहाल निलंबित है और वे जमानत पर हैं।
आसाराम वर्तमान में 29 अक्टूबर 2025 से स्वास्थ्य कारणों के आधार पर अस्थायी जमानत पर है। उसने अपनी अंतरिम जमानत बढ़ाने की भी मांग की थी, जिसे उच्च न्यायालय ने तय प्रक्रिया के तहत सुनने की बात कही है।
अब सभी की नजरें हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो इस बहुचर्चित मामले में अहम साबित होगा।