48 साल का साथ छोड़ भावुक हुए अरूप भट्टाचार्य, माकपा से तोड़ा नाता

Arup Bhattacharya breaks ties with CPI(M) after 48 years of association
संवाददाता सम्मेलन कर पदत्याग की जानकारी देते माकपा नेता अरूप भट्टचार्य
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निधि, सन्मार्ग समाचार

बैरकपुर: बंगाल की राजनीति में वामपंथ का एक और पुराना सिपाही 'लाल झंडे' का साथ छोड़ गया। माकपा के कद्दावर नेता और पूर्व सांसद तड़ित तोपदार के करीबी माने जाने वाले अरूप भट्टाचार्य ने पार्टी के साथ अपने 48 साल पुराने रिश्तों को खत्म कर दिया है। एक विशेष साक्षात्कार के दौरान अपनी राजनीतिक यात्रा को याद करते हुए अरूप की आँखें भर आईं। उन्होंने भारी मन और गहरी नाराजगी के साथ पार्टी की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया है।

आदर्शों से भटकाव का आरोप

अरूप भट्टाचार्य ने छात्र राजनीति के दौर में सुजन चक्रवर्ती और मोहम्मद सलीम जैसे दिग्गजों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आंदोलन किए थे। उन्होंने राजनीति के लिए कभी नौकरी तक नहीं की और पार्टी के 'होल-टाइमर' बने रहे। अरूप का आरोप है कि जिस आदर्श को लेकर उन्होंने आधी सदी बिताई, पार्टी अब उससे भटक गई है। उन्होंने संकेत दिया कि अकेले बैरकपुर क्षेत्र में ही 50 से 60 सक्रिय कार्यकर्ता अपना सदस्यता नवीनीकरण (Renewal) नहीं करा रहे हैं, जो पार्टी के भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं है।

सियासी बयानबाजी तेज

इस इस्तीफे पर पूर्व सांसद तड़ितवरण तोपदार ने कहा कि उन्हें अरूप के बदलते व्यवहार का आभास हो गया था। वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि माकपा का अभेद्य 'बैरिकेड' अब टूट चुका है, इसलिए लोग बाहर भाग रहे हैं। दूसरी ओर, माकपा राज्य समिति की सदस्य गार्गी चटर्जी ने इसे नाराजगी का समय न बताकर आगामी विधानसभा चुनाव की लड़ाई पर ध्यान देने की बात कही है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं अरूप से बात कर मामला सुलझाने का प्रयास करेंगी।

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