

नई दिल्ली - नेपाल में राजशाही की मांग को लेकर शुक्रवार को प्रदर्शन हिंसक हो गया। काठमांडू के विभिन्न इलाकों में आगजनी हुई और हालात इतने बिगड़ गए कि सड़कों पर सेना को तैनात करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच जमकर झड़प हुईं। राजशाही समर्थक प्रदर्शनकारी सुरक्षा बलों द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स को तोड़ने की कोशिश कर रहे थे, जिन्हें रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कई इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया।
नेपाल सरकार ने बुलाई आपातकालीन बैठक
राजशाही समर्थक संगठनों के आह्वान पर 'राजा लाओ, देश बचाओ' आंदोलन में 40 से अधिक संगठन के हजारों कार्यकर्ता काठमांडू पहुंचे। जब पुलिस प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए मौके पर पहुंची, तो हिंसक झड़पें शुरू हो गईं, जिसके परिणामस्वरूप आगजनी और तोड़फोड़ हुई। स्थिति को गंभीर होते देख नेपाल सरकार ने आपातकालीन बैठक बुलाई है।
प्रधानमंत्री ओली ने दिया बयान
नेपाल में राजशाही की वापसी की मांग बढ़ने पर हाल ही में प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली का बयान सामने आया था। 16 मार्च को उन्होंने राजशाही समर्थक समूहों पर तंज कसते हुए कहा कि लोकतंत्र एक 'राजमार्ग' जैसा है, जिसमें कोई 'रिवर्स गियर' नहीं होता, बस कभी-कभी तीखे मोड़ों के कारण गति धीमी करनी पड़ती है।
राजा ज्ञानेंद्र शाह ने की थी रैली
मार्च के पहले हफ्ते में पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह के सैकड़ों समर्थकों ने काठमांडू में उनकी अगवानी के लिए रैली निकाली थी। 77 वर्षीय ज्ञानेंद्र देश के विभिन्न धार्मिक स्थलों का दर्शन करते हुए पोखरा से काठमांडू के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे, और जैसे ही वह वहां पहुंचे, उनके समर्थकों ने उनके समर्थन में नारे लगाने शुरू कर दिए। इस रैली का मुख्य उद्देश्य नेपाल में राजशाही की पुनर्स्थापना के समर्थन को व्यक्त करना था।