

तेहरान : इजराइल-ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच भारत ने कूटनीति से एक और भारतीय एलपीजी टैंकर को सुरक्षित तरीके से होर्मुज जलडमरूमध्य पार करा लिया। दरअसल, ईरानी नौसेना ने पिछले सप्ताह एक भारतीय एलपीजी टैंकर को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से गुजरने में मदद की। यह जानकारी जहाज पर सवार एक वरिष्ठ अधिकारी से मिली है। जानकारी हो कि भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर भारतीय जहाजों की निकासी को लेकर अपने ईरानी समकक्ष से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार जहाज को पहले से तय रास्ते से निकाला गया ताकि वह हमलों से बच सके। इस दौरान जहाज का ट्रैकिंग सिस्टम (AIS) बंद कर दिया गया था। हालांकि रिपोर्ट में इस जहाज का नाम नहीं बताया गया है।
22 हजार अब भी फारस की खाड़ी में फंसे : अभी तक दो भारतीय जहाज शिवालिक (16 मार्च) और नंदा देवी (17 मार्च) होर्मुज के रास्ते LPG लेकर भारत पहुंचे हैं। वहीं फारस की खाड़ी में अभी भी करीब 22 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं। होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण और रणनीतिक समुद्री तेल मार्ग है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। ईरान के दक्षिण में स्थित यह संकरा जलमार्ग वैश्विक तेल और एलएनजी (LNG) आपूर्ति का लगभग 20-30% हिस्सा संभालता है, जो इसे ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम बनाता है। यहां से दुनिया कसे करीब 20% तेल की आपूर्ति की जाती है।
भारतीय जहाज ईरानी नौसेना के रेडियो संपर्क में थे : बताया गया कि यह टैंकर उन दो भारतीय जहाजों में से एक था जिन्हें इस संवेदनशील समुद्री यात्रा को करने की अनुमति दी गई थी। होर्मुज मार्ग को पार करते समय LPG से लदे दोनों भारतीय जहाज ईरानी नौसेना के साथ रेडियो संपर्क में थे, जिसने पोत का ध्वज, मूल स्थान, गंतव्य और चालक दल की राष्ट्रीयता सहित विस्तृत जानकारी एकत्रित की, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है। चालक दल के सभी सदस्य भारतीय थे।
भारतीय नौसैनिक भी तैनात : इधर, भारत ने भी होर्मुज जलडमरूमध्य और उत्तरी अरब सागर से जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए क्षेत्र में नौसैनिक संसाधन भी तैनात किए हैं। लगभग 22 भारतीय जहाज वर्तमान में इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं और लगातार खतरों के बीच सुरक्षा अभियान जारी है। यह घटना दर्शाती है कि संघर्ष के तीव्र होने के बावजूद कूटनीति और चुनिंदा समन्वय किस प्रकार सीमित समुद्री आवागमन को संभव बना रहे हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर भी लगातार ईरान के विदेश मंत्री के संपर्क में बने हुए हैं और फंसे जहाजों को निकलवाने की कोशिश में लगे हैं।